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सरकार आपके द्वार: सिर्फ कागजी दावे या योजनाओं के नाम पर महज़ एक और दिखावा? 

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खबरवाणी

सरकार आपके द्वार: सिर्फ कागजी दावे या योजनाओं के नाम पर महज़ एक और दिखावा? 

 

आमला-क्षेत्र में शिविरों से जनता का उठा भरोसा।

 

आमला।

प्रशासन द्वारा ‘सेवासेतु अभियान – सरकार आपके द्वार’ के तहत नागरिकों को शासकीय योजनाओं का लाभ उनके घर के पास उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। हाल ही में जारी विज्ञप्ति के अनुसार जनपद पंचायत आमला पुलिस ग्राउंड में आज 3 अक्टूबर 2026 आयोजन किया गया है, जिसमें नागरिकों की समस्याओं के निराकरण और शासकीय सेवाओं का लाभ देने की बात कही गई है।  

लेकिन इन तमाम कागजी दावों और विज्ञापनों के बीच ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है, जिससे आम जनता का इन शिविरों से पूरी तरह से विश्वास उठता नजर आ रहा है।

पुराने आवेदनों का नहीं हुआ निराकरण, ग्रामीणों में छाई निराशा

ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के आयोजन सिर्फ एक छलावा साबित हो रहे हैं। इसके पूर्व भी ग्राम ससुन्दरा में ‘मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान’ के तहत बड़े जोर-शोर से शिविर आयोजित किए गए थे, जिसमें ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं और शिकायतों के ढेरों आवेदन दिए थे। लेकिन विडंबना यह है कि उन आवेदनों पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई या निराकरण नहीं किया गया है।

 

क्या इन शिकायतों का वास्तव में होगा निराकरण?

 

आज आयोजित हो रहे शिविर को लेकर भी जनता के मन में यही सवाल गूंज रहा है कि क्या यहां दिए जाने वाले आवेदनों पर सचमुच कार्रवाई होगी या फिर यह भी पिछले शिविरों की तरह सिर्फ खानापूर्ति और महज एक दिखावा बनकर रह जाएगा? पूर्व के अनुभवों को देखते हुए आज के इस शिविर में भी ग्रामीणों की रुचि बेहद कम दिखाई दी और लोगों में इसको लेकर भारी नाराजगी व उदासीनता देखने को मिल रही है।

 

खोखले साबित हो रहे दावे: 

 

प्रशासन के उस दावे पर सवालिया निशान लग गया है जिसमें कहा गया था कि नागरिकों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, क्योंकि पूर्व के मामलों में शिविरों में आवेदन देने के बाद भी लोगों की भटकन कम नहीं हुई है।  

 

बढ़ता अविश्वास: 

 

ग्राम ससुन्दरा जैसी घटनाओं के कारण जनता का इन आयोजनों से मोहभंग हो चुका है, जिसके चलते आज के शिविर में ग्रामीणों की भागीदारी न के बराबर और रुचिहीन नजर आई।

निष्कर्ष: 

जब तक पूर्व में दिए गए आवेदनों का वास्तविक निराकरण जमीन पर नहीं उतरता, तब तक ऐसे शिविर जनता के लिए राहत कम और महज एक छलावा ज्यादा प्रतीत होते रहेंगे।

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