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पोला पर्व पर बैलों की पूजा कर किसानों ने निभाई परंपरा
हर्षोल्लास से मनाया गया पोला पर्व, बैलों को सजाकर की पूजा
किसानों ने बैलों को सजाया, खीर-पूरी खिलाकर जताया सम्मान
बुरहानपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों का पारंपरिक पर्व पोला हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर किसानों ने अपने बैलों को स्नान कराकर आकर्षक रूप से सजाया तथा पूजा-अर्चना कर पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया। घरों में विशेष पकवान बनाए गए और बैलों को खीर-पूरी खिलाकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।
पोला पर्व का ग्रामीण और कृषि संस्कृति में विशेष महत्व माना जाता है। खेती-किसानी में बैलों की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। किसान वर्षभर कृषि कार्यों में पशुओं का उपयोग करते हैं। इसी के चलते पोला पर्व पर उनके प्रति आभार और सम्मान प्रकट करने की परंपरा निभाई जाती है।
किसान नंदलाल मराठा निवासी जैनाबाद ने बताया कि किसान पूरे साल बैलों से खेती-किसानी से जुड़े विभिन्न कार्य लेते हैं। वर्ष में एक बार आने वाले पोला पर्व पर बैलों को विशेष रूप से सजाकर उनकी पूजा की जाती है। उन्होंने बताया कि इस दिन बैलों को खीर-पूरी खिलाकर पूजा-अर्चना की जाती है और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है।
सुबह से ही ग्रामीण क्षेत्रों में पर्व को लेकर उत्साह का माहौल दिखाई दिया। किसानों ने अपने बैलों को रंग-बिरंगी सजावट से सजाया। पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की गई। परिवार के सदस्यों ने भी इस आयोजन में हिस्सा लिया।
पोला पर्व ग्रामीण जीवन, कृषि परंपरा और पशुओं के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाता है। किसानों के लिए यह दिन वर्षभर कृषि कार्य में सहयोग देने वाले पशुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है।
आयोजन के दौरान परंपराओं और धार्मिक भावनाओं का पालन करते हुए पर्व मनाया





