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ऑफिस में बैठे-बैठे करोड़ों के निर्माण का मूल्यांकन?” तारा पंचायत ने खोली जनपद की मॉनिटरिंग व्यवस्था की परतें!
निरीक्षण के बिना भुगतान के आरोप, अधूरे कार्यों पर भी नहीं लगी रोक; ग्रामीण बोले- कमीशनखोरी ने निगरानी तंत्र को बना दिया ‘कागजी’, विधायक और कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच की मांग
शाहपुर। ग्राम पंचायत तारा में निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं का मामला अब एक पंचायत की सीमा लांघकर पूरे जनपद पंचायत शाहपुर की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों के आरोपों ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों का तकनीकी मूल्यांकन वास्तव में मौके पर जाकर किया जाता है, या फिर फाइलों और कार्यालयों में बैठकर ही सब कुछ “ओके” कर दिया जाता है?
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायतों में बनने वाली पुलिया, नाली, सीसी रोड और अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कागजों में पूरी कर दी जाती है, जबकि धरातल पर हकीकत कुछ और होती है। उनका कहना है कि यदि विभागीय इंजीनियर समय-समय पर निर्माण स्थलों का निरीक्षण करते, तो वर्षों से अधूरे पड़े कार्यों का भुगतान नहीं होता और घटिया निर्माण करने वालों के हौसले भी इतने बुलंद नहीं होते। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी होना शेष है।
तारा पंचायत में कई निर्माण कार्य आज भी अधूरे बताए जा रहे हैं, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि कई मामलों में भुगतान भी हो चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब निर्माण अधूरा था तो माप पुस्तिका (एमबी) किस आधार पर भरी गई? तकनीकी स्वीकृति किसने दी? और भुगतान की अनुमति किस अधिकारी ने दी?
मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि हाल ही में लगभग 14.85 लाख रुपये की लागत से बन रही कलवर्ट पुलिया सहित अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तकनीकी अमला अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाता, तो कथित अनियमितताओं की नौबत ही नहीं आती।
अब ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक गंगा सज्जन सिंह उईके और जिला कलेक्टर बैतूल को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच केवल तारा पंचायत तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जनपद पंचायत शाहपुर के सभी प्रमुख निर्माण कार्यों की भी निष्पक्ष समीक्षा कराई जानी चाहिए।
जनपद में गूंज रहे बड़े सवाल
क्या बिना स्थल निरीक्षण किए तकनीकी मूल्यांकन किया जा रहा है?
अधूरे निर्माण कार्यों का भुगतान किन दस्तावेजों के आधार पर हुआ?
यदि कार्य गुणवत्ताहीन थे, तो इंजीनियरों ने समय रहते आपत्ति क्यों नहीं उठाई?
क्या मॉनिटरिंग सिस्टम केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है?
यदि जांच में गड़बड़ी सामने आती है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
जिम्मेदारों का पक्ष
रोशनी वर्मा, सीईओ जनपद पंचायत शाहपुर ने कहा,
“मैं पूरे मामले को दिखवाता हूं। यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो नियमानुसार जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।”
सतीश कैराना, सहायक यंत्री (एई), जनपद पंचायत शाहपुर ने कहा,
“मुझे इस मामले की जानकारी हाल ही में मिली है। मैं स्वयं मौके पर जाकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण करूंगा। यदि कहीं तकनीकी अनियमितता पाई गई तो नियमानुसार कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा।”





