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सारनी में रोजगार का संकट, मजदूरी के लिए पलायन को मजबूर स्थानीय लोग
खबरवाणी/रफीक
सारनी। पाथाखेड़ा क्षेत्र में रोजगार के अवसर लगातार घटने से स्थानीय लोगों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। क्षेत्र में पहले संचालित नौ कोयला खदानों में से छह बंद हो चुकी हैं और अब केवल तीन खदानें ही चल रही हैं। वहीं, सतपुड़ा पावर प्लांट में नई भर्तियां नहीं होने और बड़ी संख्या में कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लगातार सीमित होते जा रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में लोग दूसरे शहरों और राज्यों में मजदूरी करने के लिए पलायन को मजबूर हैं। इन दिनों सुबह के समय पिकअप वाहनों में मजदूरों को भरकर बाहर ले जाने का सिलसिला आम दिखाई देता है। बताया जाता है कि कुछ एजेंट गांवों और आसपास के क्षेत्रों से मजदूरों को तय मजदूरी पर बाहर ले जाते हैं और उनके श्रम से मिलने वाली राशि में से कमीशन लेते हैं।
मजदूरों को पिकअप वाहनों में क्षमता से अधिक संख्या में बैठाकर ले जाने से उनकी सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। रोजाना बड़ी संख्या में मजदूर ऐसे वाहनों से बाहर जाते दिखाई देते हैं। ओवरलोड वाहनों के कारण दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
हाल ही में बैतूल-परतवाड़ा मार्ग पर मजदूरों से भरा एक पिकअप वाहन पलट गया था, जिसमें सवार मजदूर घायल हो गए। ऐसी घटनाओं से मजदूरों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी कोयला खदानों और पावर प्लांट के कारण रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध थे, लेकिन खदानों के बंद होने और नई भर्तियां नहीं होने से स्थिति बदल गई है। रोजगार के अभाव में परिवार चलाने के लिए लोगों को मजबूरी में बाहर जाना पड़ रहा है।





