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गोदाम से टैंकर तक धूल-मिट्टी की परतों में खाद्य तेल, त्योहार से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच पर उठे सवाल
बुरहानपुर। त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे खाद्य पदार्थों की बिक्री और मांग भी बढ़ रही है। ऐसे समय में खाद्य तेल की गुणवत्ता और उसके सुरक्षित भंडारण को लेकर निगरानी और जांच का महत्व और बढ़ जाता है। शहर के बाजार और मंडी क्षेत्रों में खाद्य तेल से जुड़े भंडारण एवं परिवहन स्थलों पर स्वच्छता व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। तेल की टंकियों, गोदामों और टैंकरों के बाहरी हिस्सों पर मिट्टी और धूल की परत दिखाई देने की स्थिति में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि खाद्य तेल का भंडारण और परिवहन निर्धारित स्वच्छता मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
टंकी के ऊपर मिट्टी, आखिर अंदर की स्थिति कैसी?
खाद्य तेल की टंकियों के बाहरी हिस्से पर यदि लंबे समय से मिट्टी और धूल जमी दिखाई देती है तो संबंधित भंडारण व्यवस्था का निरीक्षण किया जाना जरूरी है। केवल बाहरी सतह देखकर तेल में मिलावट या दूषण का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन ऐसी स्थिति खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए निरीक्षण का आधार जरूर बन सकती है।
सबसे अहम सवाल तेल की गुणवत्ता का है। क्या संबंधित टंकियों की समय-समय पर सफाई होती है? क्या ढक्कन और पाइपलाइन सुरक्षित हैं? क्या टैंकरों में खाद्य तेल के परिवहन के दौरान स्वच्छता मानकों का पालन किया जाता है? इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और दस्तावेजों से ही सामने आ सकता है।
तेल गोदामों पर धूल की परत, त्योहार से पहले जांच जरूरी
थोक बाजारों और तेल गोदामों में बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का भंडारण होता है। यदि गोदामों में स्वच्छता व्यवस्था कमजोर है या कंटेनर लंबे समय तक धूल-मिट्टी के संपर्क में रहते हैं, तो खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से निरीक्षण आवश्यक हो जाता है।
त्योहारों के पहले खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा ऐसे गोदामों का निरीक्षण कर भंडारण व्यवस्था, पैकेजिंग, लेबल, बैच नंबर, निर्माण एवं समाप्ति तिथि तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा सकती है। आवश्यकता होने पर खाद्य तेल के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में परीक्षण कराया जाना चाहिए।
टैंकरों की भी हो जांच
खाद्य तेल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले टैंकर भी निगरानी के दायरे में होने चाहिए। टैंकर की सफाई, उसके उपयोग का रिकॉर्ड, खाद्य सामग्री के परिवहन के लिए उसकी उपयुक्तता और तेल के संपर्क में आने वाले हिस्सों की स्वच्छता की जांच की जरूरत है।
टैंकर के बाहरी हिस्से पर मिट्टी या धूल की परत दिखाई देना अपने आप में तेल में मिलावट का प्रमाण नहीं है। लेकिन यदि स्वच्छता संबंधी शिकायत या परिस्थितियां सामने आती हैं तो विभाग द्वारा नियमानुसार निरीक्षण और आवश्यक नमूना परीक्षण कराया जा सकता है।
मंडी-बाजार में खुले में तेल, धूल का खतरा
मंडी और बाजार क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। सड़क से उड़ने वाली धूल, मिट्टी और वाहनों से निकलने वाले धुएं के बीच खाद्य सामग्री का खुले में रखा जाना स्वच्छता के लिहाज से चिंता का विषय बन सकता है।
यदि खाद्य तेल के कंटेनर खुले में रखे हैं और उनके ढक्कन ठीक से बंद नहीं हैं, तो संबंधित स्थान की स्वच्छता व्यवस्था की जांच जरूरी है। दुकानदारों और कारोबारियों की जिम्मेदारी है कि खाद्य सामग्री को धूल, गंदगी और अन्य प्रदूषकों के संपर्क से सुरक्षित रखा जाए।
मिलावट का सवाल, जांच के बाद ही निकलेगा सच
त्योहारों के दौरान खाद्य तेल की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं बाजार में मिलावटी या मानक से कम गुणवत्ता वाला तेल तो नहीं पहुंच रहा।
लेकिन किसी भी तेल को मिलावटी घोषित करने से पहले अधिकृत प्रक्रिया के तहत नमूना लेना और प्रयोगशाला परीक्षण आवश्यक है। इसलिए विभाग को शिकायतों और निरीक्षण के आधार पर नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक जांच करानी चाहिए। रिपोर्ट में यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
कब जागेगा सिस्टम?
त्योहारों के दौरान बाजारों में खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत को देखते हुए सवाल यह है कि क्या जांच अभियान केवल शिकायत के बाद चलेगा या विभाग पहले से ही सक्रिय निगरानी करेगा?
तेल की टंकियां, तेल के गोदाम, टैंकर, मंडी क्षेत्र और खुदरा बाजार—इन सभी स्तरों पर खाद्य सुरक्षा की जांच की आवश्यकता है।
विभाग द्वारा यह भी देखा जाना चाहिए कि खाद्य तेल कहां से आ रहा है, किस तरह परिवहन किया जा रहा है, कहां भंडारित हो रहा है और उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले उसकी गुणवत्ता एवं पैकेजिंग से संबंधित आवश्यक नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा
खाद्य तेल रोजाना इस्तेमाल होने वाला खाद्य पदार्थ है। इसलिए इसकी गुणवत्ता और स्वच्छता से जुड़ा मामला सीधे उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़ता है। किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
साथ ही यह भी जरूरी है कि बिना जांच किसी कारोबारी पर मिलावट का आरोप न लगाया जाए। शिकायत हो तो नमूना लिया जाए, प्रयोगशाला में परीक्षण हो और रिपोर्ट के आधार पर ही कानूनी कार्रवाई की जाए।
त्योहार से पहले खाद्य विभाग के सामने बड़ी जिम्मेदारी
त्योहार नजदीक हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग यदि विशेष अभियान चलाकर तेल के गोदामों, टैंकरों, टंकियों और बाजारों का निरीक्षण करता है तो खाद्य तेल की गुणवत्ता तथा भंडारण व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
मिट्टी की परत केवल टंकी और टैंकर के बाहर है या व्यवस्था की निगरानी पर भी धूल जम गई है—इसका जवाब जांच से ही सामने आएगा।
अब देखना यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग कब अभियान चलाता है, कितने नमूने लिए जाते हैं और जांच रिपोर्ट में क्या स्थिति सामने आती है। त्योहारों से पहले प्रभावी जांच और नियमों का पालन सुनिश्चित करना उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण कदम होगा।





