Tuesday, August 16, 2022
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Deforestation : सतपुड़ा जलाशय में सैकड़ों बड़े पेड़ों को काटने की तैयारी

सारनी(हेमंत रघुवंशी)– सतपुड़ा जलाशय सारनी के पास मौजूद जंगल में नगरपालिका सारनी के माध्यम से सैकड़ों वृक्षों को काटने की तैयारी की जा रही है। मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के माध्यम से लगभग सौ करोड़ रुपए से पंप हाउस के निर्माण और शहर में पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।

जल आवर्धन योजना के तहत सतपुड़ा जलाशय में बन रहे पंप हाउस में बिजली पहुंचाने के लिए सतपुड़ा जलाशय के घने जंगलों के बीच में से विद्युत लाइन लेजाने हेतु खंभे लगाने का कार्य किया जा रहा है। जिसके लिए कुछ वृक्षों को काट भी दिया गया है।

सारनी निवासी वाइल्डलाइफ एंड नेचर कंजर्वेशन एक्टिविस्ट आदिल खान ने जब सतपुड़ा जलाशय में पेड़ों को कटते देखा तो उन्होंने इसकी शिकायत मध्यप्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हेड ऑफ फारेस्ट फोर्स), प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी, मध्यप्रदेश जैव विविधता बोर्ड, वनमंडलाधिकारी उत्तर बैतूल को की। आदिल ने अपनी शिकायत में बताया कि उक्त क्षेत्र में बाघ व तेंदुए का मूवमेंट बना रहता है।

इसके सिवा उडऩे वाली गिलहरी, सतपुड़ा लियोपर्ड गेको एक खास तरह कि छिपकली जो कि पूरी दुनिया भी में सिर्फ मध्य भारत में ही पाई जाती है, दुनिया की सबसे छोटी बिल्ली रस्टी स्पॉटेड कैट, सैकड़ों तरह के पक्षियों व सरीसृपों इत्यादि का रहवास भी उक्त जंगल में है। जिस वजह से उक्त क्षेत्र वन्यप्राणियों के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील है।
आदिल ने बताया कि यहां एक भी वृक्ष काटना बेहद गलत होगा और ये वन्यप्राणी अधिनियम 1972 का भी उल्लंघन है। इतने वन्यप्राणियों के होने के बावजूद बिना किसी की इजाज़त के जंगल में ट्रैक्टर ट्रॉली ले जाई गई और पेड़ों को काटकर खंभे भी लगाए गए हैं।

अपनी शिकायत में आदिल ने यह भी जांच की मांग की थी कि किसकी इजाजत से पेड़ों को काटा जा रहा है। इस संबंध में आदिल ने 14 अप्रैल को शिकायत की थी, इसके बाद 23 अप्रैल की सुबह जब आदिल उक्त जंगल में गए तो उन्होंने पाया कि पेड़ों पर काटने के लिए नंबर डाल दिए गए हैं जो? शिकायत से पहले नहीं डालें गए थे। आदिल का कहना है पहले तो बिना किसी कानून का पालन करें पेड़ों को काटा गया और खंभे लगाए गए फिर शिकायत के बाद उन्हें लीगल बताने के लिए पेड़ों पर नंबर डाल दिया गया जबकि उक्त क्षेत्र में पेड़ काटना वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 का भी उल्लंघन है।

आदिल का कहना है कि मध्य प्रदेश पावर जेनरेटिंग कंपनी ने जब अपने नए पंप हाउस का निर्माण सतपुड़ा जलाशय में किया था तो कई जगह से बिजली की लाइन को अंडरग्राउंड ले जाया गया जिससे कि पेड़ों को नहीं काटना पड़ा, इसी तरह नगरपालिका को भी अंडरग्राउंड बिजली की लाइन को पंप हाउस तक ले जाना चाहिए। आदिल ने जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी तरह का कार्य करने से पहले पर्यावरण के अनुकूल योजना बनाने के लिए प्राथमिकता दी जाती है परंतु फिर भी सतपुड़ा जलाशय में बेवजह इन पेड़ों को काटने की तैयारी हो रही है।

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