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हाथ लगाते ही टूट रहीं ईंटें, छात्रावास निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप- घटिया निर्माण सामग्री से हो रहा निर्माण; सामग्री की आपूर्ति को लेकर भी उठे सवाल, गुणवत्ता से समझौते की आशंका, तकनीकी जांच की मांग।
भौंरा। संदीपनी विद्यालय शाहपुर में लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 100 सीटर छात्रावास निर्माण कार्य में अब उपयोग की जा रही ईंटों की गुणवत्ता को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में लगाई जा रही सफेद ईंटें इतनी कमजोर हैं कि हाथ से दबाव देने पर ही टूट जाती हैं। इसे लेकर लोगों ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर शंका जताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी भवन की मजबूती उसकी नींव के साथ-साथ निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। यदि निर्माण में मानक से कमजोर ईंटों का उपयोग किया जा रहा है तो भविष्य में भवन की मजबूती प्रभावित हो सकती है। लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजना में गुणवत्ता से कहीं न कहीं समझौता किया जा रहा है।
सूत्रों के हवाले से क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि निर्माण में उपयोग की जा रही ईंटों की आपूर्ति एक ऐसे स्रोत से हो रही है, जिसका संबंध विभाग से जुड़े एक इंजीनियर के परिवार से बताया जा रहा है। इस चर्चा के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण सामग्री की खरीद प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि यह तथ्य सही है तो पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सामग्री की खरीद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुई या नहीं तथा गुणवत्ता परीक्षण किस आधार पर किया गया।
लोगों का कहना है कि अब तक मजदूरों की सुरक्षा, निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड का अभाव, गुणवत्ता परीक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल और अब ईंटों की गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतें यह संकेत देती हैं कि निर्माण कार्य की निगरानी को और अधिक गंभीर बनाने की आवश्यकता है। उनका आरोप है कि यदि विभागीय इंजीनियर नियमित रूप से निर्माण की गुणवत्ता का निरीक्षण कर रहे हैं, तो फिर ऐसी शिकायतें लगातार क्यों सामने आ रही हैं।
सरकारी निर्माण कार्यों में भारतीय मानक ब्यूरो तथा गुणवत्ता नियंत्रण संबंधी प्रावधानों के अनुसार निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप होना आवश्यक है तथा आवश्यकता पड़ने पर उसका परीक्षण कराया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि निर्माण में उपयोग की जा रही ईंटों सहित सभी प्रमुख निर्माण सामग्री के नमूनों की मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जांच कराई जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि गुणवत्ता को लेकर उठ रहे संदेह दूर हो सकें।




