Bhainsdehi Assembly – चौहानों की विरासत बनी भैंसदेही विधानसभा सीट

14 में से 12 बार चौहान परिवार में ही मिली टिकट

Bhainsdehi Assemblyबैतूल जिले के अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित भैंसदेही विधानसभा सीट की राजनैतिक विरासत चौहान परिवार के पास ही रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि 14 विधानसभा चुनाव में 12 बार चौहान परिवार के सदस्यों को चुनाव लडऩे का मौका मिला। यह बात अलग है कि किसी को भाजपा(जनसंघ,जनता पार्टी) ने टिकट दी तो किसी को कांग्रेस ने टिकट दी। 1957 में विधानसभा सीट का गठन हुआ था और इसके बाद यहां पर सबसे पहले विधायक कांग्रेस के सोमदत्त बने थे। अगर देखा जाए तो यह सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है |

8 बार बीजेपी जीती, 6 बार कांग्रेस

भैंसदेही विधानसभा में अभी तक 14 बार चुनाव हुए हैं। जिसमें 12 बार चौहान परिवार के सदस्य चुनाव लड़े हैं। महेंद्र सिंह चौहान का परिवार ऐसा है कि उनकी यह तीसरी पीढ़ी है जो चुनाव लड़ रही है। भाजपा ने सबसे ज्यादा भरोसा महेंद्र सिंह चौहान पर किया है। यही कारण है कि 1998 से 2023 तक वे लगातार भाजपा के प्रत्याशी रहे हैं। इस विधानसभा सीट में हुए 14 चुनाव में से 8 बार बीजेपी जीती और 6 बार कांग्रेस की जीत हुई।

चौहान परिवार का जलवा | Bhainsdehi Assembly

भैंसदेही विधानसभा में 1962 में दद्दू सिंग जनसंघ से जीते, 1967 में फिर दद्दू सिंग जनसंघ से जीते, 1972 में इनके बेटे केशरसिंह को टिकट मिली थी पर चुनाव हार गए थे, 1980 में केशर सिंह बीजेपी से जीते, 1990 में केशर सिंह बीजेपी से जीते, 1992 में केशरसिंह को बीजेपी से टिकट मिली लेकिन वे चुनाव हार गए, 1998 में केशर सिंह के पुत्र महेंद्र सिंह चौहान को पहली बार टिकट मिली और अब उनका यह छटवां चुनाव है जो वह लड़ रहे हैं। इसमें वे 3 चुनाव जीत गए और 2 चुनाव हारे हैं। इस प्रकार एक ही परिवार को जनसंघ भाजपा ने 12 बार टिकट दी है।

कांग्रेस ने भी जताया भरोसा

भैंसदेही में 14 चुनाव में से 9 बार चौहान परिवार के सदस्यों को कांग्रेस और भाजपा ने टिकट दी है और वे चुनाव भी जीते हैं। कांग्रेस ने चौहान परिवार के सदस्यों पर भरोसा जताया और 1972 में काल्यासिंह चौहान को कांग्रेस ने टिकट दी और वे चुनाव जीते। इसके बाद 1985 के विधानसभा चुनाव में सतीष चौहान कांग्रेस से चुनाव जीते।

कांग्रेस ने दो उम्मीदवार को तीन बार किया रिपीट | Bhainsdehi Assembly

1972, 1977, 1980 में काल्यासिंह को कांग्रेस ने टिकट दी लेकिन वे सिर्फ 1972 में ही जीते। इसी तरह से धरमूसिंह सिरसाम को 2008, 2013 और 2018 में टिकट दी लेकिन तीन चुनाव में से 2008 और 2018 में चुनाव जीते।

कांग्रेस-भाजपा से ये बने विधायक

1957 में कांग्रेस से सोमदत्त जीते, 1962 और 1967 में दद्दू सिंग जनसंघ से जीते, 1972 में काल्यासिंग कांग्रेस से जीते, 1977 में पतिराम तांडिल्य जनता पार्टी से जीते, 1980 में केसर सिंह भाजपा से जीते, 1985 में सतीष चौहान कांग्रेस से जीते, 1990 में केसर सिंह भाजपा से जीते, 1993 में गंजन सिंह कुमरे कांग्रेस से जीते, 1998 और 2003 में महेंद्र सिंह भाजपा से जीते, 2008 में धरमूसिंह कांग्रेस से जीते, 2013 में महेंद्र सिंह भाजपा से जीते और 2018 में धरमूसिंह कांग्रेस से चुनाव जीते।

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