Betul Hospital – बैतूल – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ्य भारत अभियान को बैतूल जिला अस्पताल प्रबंधन कैसे पलीता लगा रहा है इसका नजारा परिसर में व्याप्त गंदगी को देखकर मिल रहा है। जहां गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जिला अस्पताल प्राइवेट कंपनी को हर साल 60 से 70 लाख रुपए सफाई के लिए देता है।
इसके बाद भी जिला अस्पताल परिसर में कई जगह कचरे के ढ़ेर लगे हैं। हालात यह है कि यहां पर मवेशी कचरे को खाते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। सफाई में हो रही इस बड़ी लापरवाही पर प्रबंधन देखकर भी अनदेखा कर रहा है।
नजारा ट्रामा सेंटर का | Betul Hospital
ट्रामा सेंटर और डिलेवरी वार्ड के बीच स्थित गली में कचरे का अंबार लग चुका है। गंदगी की इतनी अति हो गई है कि कहा नहीं जा सकता है। कचरे-कूड़े से लेकर गंदे कपड़े, दवाईयों के रेपर, डिस्पोजल सहित सब यहां पर पड़े हुए हैं। इस कचरे की सड़ांध से समूचे परिसर में दुर्गंध फैल रही है लेकिन सफाई कराने के लिए कोई भी आगे नहीं आ रहा है।

मेटरनिटी वार्ड होने के कारण यह वार्ड संवेदनशील है और इसके पीछे इतनी गंदगी पड़ी होने से इसका दुष्प्रभाव प्रसूताओं पर पड़ सकता है। मरीजों के साथ आने वाले उनके परिजन गंदगी की बदबू से भी परेशान नजर आते हैं।
मवेशी खा रहे हैं कचरा
जिला अस्पताल की मेन बिल्ंिडग के एक्सरे रूम के बाजू वाली गली में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। यहां पर दवाई गोली के खाली परचे से लेकर खराब खाने को भी फेंंक दिया गया है। इस कचरे में पालतू जानवर भी विचरण करते हुए इसे खा रहे हैं और कचरा फैला रहे हैं।
यहां पर सवाल यह उठता है कि जब अस्पताल की सफाई का लाखों रुपए में ठेका दिया गया है तो फिर कचरा यहां-वहां क्यों पड़ा हुआ है।

कर्मचारी और अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान | Betul Hospital
जिला अस्पताल मे इस तरह की बेहिसाब गंदगी सोचने पर मजबूर करती है कि यहां आम लोग बीमारी से बचने आते है या बीमार होने। वहीं संबधित कर्मचारी और अधिकारी इस ओर ध्यान क्यों नही दे पा रहे है? ये भी एक बड़ा विषय है।
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जिला अस्पताल के अंदर तो लगभग पूरी साफ-सफाई का इंतजाम होता है पर जिला अस्पताल परिसर में ऐसी गंदगी जो बड़ी बिमारियों को जन्म दे सकती है। उस पर क्यों कोई ध्यान नहीं दे पा रहा है? या तो संबधित कर्मचारी और अधिकारी इसे गंदगी नहीं समझ रहे है या फिर उन्हें इससे कोई वास्ता नहीं है।
गंदगी की यह स्थिति अफसोस जनक
जिला अस्पताल में ज्यादातर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग बीमारी से ग्रसित होकर भर्ती होते है। ग्रामीण सीधे-साधे होने के कारण वह इन सब समस्याओ को लेकर किसी से शिकायत नहीं करते हैं।
वहीं बैतूल में सफाई पर इतना अच्छा कार्य होने के बावजूद भी जिला अस्पताल द्वारा साफ सफाई के प्रति ध्यान नहीं देते हुए मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करना कहीं ना कहीं जिला अस्पताल प्रबंधन की उदासीनता को दर्शा रहा है।
इनका कहना…
वाहन की व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बार कचरे के ढ़ेर उठ नहीं पाते हैं, फिर भी मैं इसको दिखवाता हूं।