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आमला । भीषण गर्मी में मिलावट का खेल: आमला में खाद्य विभाग की ‘सैंपल’ वाली खानापूर्ति, जनता बोली- सिर्फ रस्म अदायगी
जूस सेंटर्स से लिए 8 सैंपल, लेकिन रिपोर्ट का सालों से अता-पता नहीं; विभाग की गोपनीयता पर उठे सवाल
आमला । ब्लॉक में सूरज की तपिश बढ़ते ही ठंडे पेय पदार्थों की मांग बढ़ गई है, और इसी के साथ शुरू हो गया है मिलावटखोरों के खिलाफ प्रशासन का चिर-परिचित ‘अभियान’। जिला कलेक्टर डॉ. सौरभ सोनबने के सख्त निर्देश और अभिहित अधिकारी शैलेंद्र बडोनिया की अगुवाई में गुरुवार को खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने आमला में दबिश दी। हालांकि, विभाग की इस फुर्ती को स्थानीय जनता महज एक वार्षिक ‘रस्म अदायगी’ के तौर पर देख रही है।
जूस सेंटर्स पर छापेमारी, 8 नमूने जब्त
खाद्य सुरक्षा अधिकारी शशि भारतीय एवं पुरुषोत्तम भंडुरिया की टीम ने नगर के प्रमुख जूस सेंटर्स का औचक निरीक्षण किया। टीम ने जियान जूस सेंटर से पाइनएप्पल शेक, मैंगो शेक, अप्पी फीज और चेंज कैफीनेटेड ड्रिंक के नमूने लिए। इसके बाद सोनम जूस सेंटर पर कार्रवाई करते हुए बनाना शेक, पाइनएप्पल शेक, कोकोकोला और थम्सअप सहित कुल 8 सैंपल एकत्रित किए। अधिकारियों ने मौके पर संचालकों को स्वच्छता बनाए रखने की हिदायत दी और नमूनों को राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजने की बात कही।
जनता का आक्रोश: “आओ, सैंपल लो और भूल जाओ”
विभाग की इस कार्रवाई पर आमला के नागरिकों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। लोगों का कहना है कि विभाग की कार्यशैली ‘ढाक के तीन पात’ जैसी है। शहरवासियों के मुताबिक, सालों से विभाग होटलों और दुकानों से नमूने भरता आ रहा है, लेकिन आज तक किसी को यह नहीं पता चला कि उन रिपोर्ट्स का क्या हुआ? विभाग ने कभी भी यह डेटा सार्वजनिक नहीं किया कि पिछले एक साल में कितने सैंपल फेल हुए और कितने मिलावटखोरों को जेल हुई या उन पर भारी जुर्माना लगा।
गोपनीयता के पीछे क्या है खेल?
जागरूक नागरिकों का गंभीर आरोप है कि जांच रिपोर्ट को गोपनीय रखना मिलावटखोरों को संरक्षण देने जैसा है। यदि किसी दुकान का सैंपल फेल होता है, तो उसका नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? रिपोर्ट सार्वजनिक न होने के कारण दुकानदार बेखौफ होकर जनता की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। फिलहाल, अधिकारी वही पुराना राग अलाप रहे हैं कि “रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी”, लेकिन जनता अब इस खोखले भरोसे पर यकीन करने को तैयार नहीं है।





