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स्वावलंबन की डोर नरसिंहपुर केंद्रीय जेल के बंदियों ने बनाईं खास राखियां और हैंड पर्स
नरसिंहपुर। रक्षाबंधन के पवित्र त्योहार पर इस बार केंद्रीय जेल नरसिंहपुर में एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिल रही है। जेल की चारदीवारी के भीतर बंद महिला और पुरुष बंदियों ने अपनी रचनात्मकता और हुनर के दम पर इस त्योहार को खास बना दिया है। जेल प्रशासन की इस सुधारात्मक और कौशल विकास पहल से बंदियों को आत्मनिर्भर बनने की एक नई राह मिल रही है। रेशमी धागों और मोतियों से सजी हस्तनिर्मित राखियां
महिला बंदियों द्वारा तैयार की गईं पूर्णत हस्तनिर्मित राखियां इस समय बाजार और लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। रेशमी धागों, मोतियों और पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों से सजी ये राखियां न केवल दिखने में बेहद खूबसूरत हैं, बल्कि इनमें बहनों के स्नेह के साथ-साथ बंदियों के स्वावलंबन की भावना भी रची-बसी है। इन राखियों की फिनिशिंग और डिजाइन इतनी बेहतरीन है कि जो भी इन्हें देख रहा है, वह तारीफ किए बिना नहीं रह पा रहा है।
आकर्षक हैंड पर्स बने बेहतरीन उपहार
दूसरी ओर, जेल के पुरुष बंदियों ने भी अपने हुनर का शानदार प्रदर्शन किया है। पुरुष बंदियों द्वारा तैयार किए गए सुंदर और आकर्षक ‘हैंड पर्स’ हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। बेहतरीन कारीगरी और मजबूती के साथ बनाए गए ये पर्स रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों को देने के लिए एक बेहतरीन उपहार साबित हो रहे हैं।
वर्जन —
“यह पहल बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए की गई है। त्योहार के इस अवसर पर उनके द्वारा तैयार की गई सामग्री यह संदेश देती है कि और हुनर कभी सीमाओं में नहीं बंधते।”
— एडवर्ड स्वामी, जेलर, केंद्रीय जेल नरसिंहपुर




