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ठेका मजदूरों का खदान परिसर में प्रवेश निषेध का चिपकाए पोस्टर पर बड़ा विवाद

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ठेका मजदूरों का खदान परिसर में प्रवेश निषेध का चिपकाए पोस्टर पर बड़ा विवाद

खबर वाणी न्यूज़ रफीक

सारनी। पाथाखेड़ा क्षेत्र की तवा-2 कोयला खदान एक बार फिर विवादों में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले खदान परिसर में लोहा तांबा कोयला माफिया, चोर-उचक्के और हथियारबंद असामाजिक तत्व रात के समय घुसकर कामगारों को डराते-धमकाते थे और मारपीट तक करते थे। कुछ मामलों में कर्मचारियों के साथ अमानवीय व्यवहार की घटनाएं भी सामने आई थीं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निगरानी के लिए सीसीटीवी जैसे साधनों का उपयोग कर उनकी फुटेज भी मौजूद रही, लेकिन ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के पोस्टर कभी नहीं चिपकाए गए।
हालांकि वर्तमान में इस तरह की घटनाएं कम हुई हैं, लेकिन अब खदान प्रबंधन की कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि जिन असामाजिक तत्वों के खिलाफ खदान परिसर में प्रवेश निषेध पोस्टर वाली कार्रवाई होनी चाहिए थी, उनके बजाय प्रबंधन ने ठेका मजदूरों को ही निशाना बना लिया है। खदान परिसर में लखीराम और धर्मेंद्र चौरे के पोस्टर चस्पा कर उनका खदान परिसर में प्रवेश निषेध कर दिया गया है।
बताया जा रहा है कि ये दोनों ठेका मजदूर वर्षों से खदान में कार्यरत हैं और उनकी “गलती” सिर्फ इतनी है कि उन्होंने अपने वेतन और अधिकारों को लेकर ठेका मजदूर आंदोलन में भाग लिया था। लखीराम उस गोद लिए गए गांव से हैं, जहां खदान शुरू होने से पहले जमीन अधिग्रहण के बदले रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था।
ठेका श्रमिक मजदूर समिति ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे तानाशाही और मजदूर विरोधी कदम बताया है। उनका कहना है कि जिन लोगों के खिलाफ पुलिस थानों में पहले से रिकॉर्ड मौजूद हैं, उनके बजाय मेहनतकश मजदूरों पर कार्रवाई करना अन्यायपूर्ण है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि यह रवैया जारी रहा तो मजदूर आंदोलन को और तेज करेंगे।

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