
New District – बैतूल – 1956 में मध्यप्रदेश का गठन हुआ था। उस दौरान जिलों की संख्या लगभग 45 थी। लेकिन 1995-96 के दौरान सबसे ज्यादा 16 नए जिलों का गठन हुआ और जिलों की संख्या 61 हो गई। उस समय मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह थे। 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बन गया। इसके कारण बढ़े हुए जिलों में से अधिकांश जिले छत्तीसगढ़ में चले गए। वर्तमान में मध्यप्रदेश में 52 जिले थे। और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 3 नए जिले पांढुर्णा, नागदा एवं मऊगंज की घोषणा करने के बाद इनकी संख्या 55 हो गई। लेकिन बैतूल जिले के मुलताई निवासी नए जिलों की घोषणा में अपने गांव का नाम ढूंढते रहे।
वैसे तो लंबे समय से क्षेत्रवासी मुलताई को जिला बनाने के लिए समय-समय पर मंाग करते रहे हैं लेकिन न तो इसके लिए कोई गंभीर प्रयास हुए और ना ही मुलताई को जिला बनाने के लिए जिले के सभी दलों के प्रमुख नेताओं और सांसदों एवं विधायकों का कभी साथ मिला। इसीलिए नए जिलों की घोषणा में मुलताई को कोई स्थान ना कांग्रेस की 10 वर्ष की दिग्विजय सिंह सरकार ने दिया और ना ही 18 साल की भाजपा की शिवराज सरकार ने दिया। वहीं 2018 में 15 महीने तक कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार ने भी मुलताई को जिला बनाने के लिए कोई रिस्पांस ही नहीं दिया। जबकि कमलनाथ के कट्टर समर्थकों की मुलताई में लंबी फेहरिस्त है।
हाल ही में पांढुर्णा को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिला घोषित कर दिया है। जिसमें पांढुर्णा और सौंसर दो तहसीलों को शामिल किया गया है। पांढुर्णा को जिला घोषित करते ही फिर एक बार मुलताई क्षेत्र में थोड़े देर का उबाल आया जो कुछ समय बाद ठण्डा हो गया। क्योंकि मुलताईवासी भी समझ गए हैं कि राजनैतिक स्तर पर पकड़ नहीं होने के कारण मुलताई का जिला बनना दूर की कौड़ी लग रहा है। चर्चा तो यह भी थी कि जैसे ही पांढुर्ना को जिला बनाया गया उसमें तीसरी तहसील मुलताई रखी जानी थी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
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खबरवाणी को प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य स्तर पर मुलताई को जिला बनाए जाने के लिए कभी कोई प्रस्ताव सामने आया ही नहीं। क्योंकि जो नए जिले बनाए जाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रस्ताव विचाराधीन है उसमें मंदसौर जिले में गरोट, सागर जिले में बीना, विदिशा जिले में सिरोंज, रायसेन जिले में बरेली, गुना जिले में चाचोड़ा, राजगढ़ जिले में नरसिंहगढ़ और सतना जिले में मैहर को लेकर जिला बनाने की मांग उठती रही है। इसकी जानकारी राज्य सरकार को भी है। इसी तरह से देवास जिले से अलग बागली को जिला बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस बारे में जिले से प्रतिवेदन भी बुलाया जा चुका है।
मध्यप्रदेश के मौजूदा जिलों में जबलपुर से अलग होकर कटनी जिला बना। मंडला जिले से अलग होकर डिंडोरी जिला, खण्डवा जिले से अलग होकर बुरहानपुर, खरगौन से अलग होकर बडवानी, होशंगाबाद से अलग होकर हरदा, गुना से अलग होकर अशोक नगर और झाबुआ से अलग होकर अलीराजपुर बना था। गौरतलब है कि इन जिलों में राजनैतिक स्तर पर कांग्रेस-भाजपा दोनों ही पार्टियों में राज्य और केंद्र स्तर तक पकड़ बनाए रखने वाले नेता हैं। इन नए जिलों में कई तो केंद्रीय मंत्री और कई मध्यप्रदेश में विभिन्न मंत्री मंडलों में मंत्री है और रहे भी हैं। और इन्हीं के प्रयासों से यह जिले बन पाए हैं। जबकि बैतूल में ऐसा कोई नेतृत्व आज तक विकसित नहीं हो पाया है जो नया जिला बनवा सके।
चुनाव पास आते ही आई मुलताई को जिला बनाने की याद | New District
जैसे ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुलताई की पड़ोसी तहसील छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्णा को जिला घोषित किया। वैसे ही मुलताई के अनेक संगठन और राजनैतिक दलों के सदस्यों ने मुलताई को जिला बनाने के लिए प्रदर्शन-आंदोलन करने की बात शुरू कर दी है। यदि मुलताई क्षेत्र के सभी राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के सदस्य संगठित होकर मुलताई को जिला बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते तो शायद राज्य शासन और प्रदेश के बड़े नेताओं के बीच भी मुलताई को जिला बनाने के लिए गंभीरता से विचार किया जाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और परिणाम मुलताई को छोड़ पांढुर्णा जिला बन गया। अब मुलताई को जिला बनाने के लिए क्षेत्रवासियों को नई सरकार का इंतजार करना होगा। ऐसा राजनैतिक समीक्षकों का आंकलन है।






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