Search ई-पेपर ई-पेपर WhatsApp

कागजों में दौड़ा ‘जागरूकता’ का रथ महिला एवं बाल विकास विभाग का अनोखा कारनामा…..

By
—
On:

खबरवाणी

कागजों में दौड़ा ‘जागरूकता’ का रथ महिला एवं बाल विकास विभाग का अनोखा कारनामा……….

 

जिले सीमाएं लांघ गया भ्रष्टाचार नियम-कायदों की उड़ीं धज्जियां प्रचार प्रसार में अशोकनगर छोड़ गुना जिले की पोत दी दीवारें…….

 

सुशील कुशवाह खबर वाणी अशोकनगर। सरकारी योजनाओं के नाम पर बजट को ठिकाने लगाने के कलात्मक खेल तो आपने कई देखे होंगे, लेकिन अशोक नगर जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग ने भ्रष्टाचार का एक ऐसा अनूठा अध्याय लिखा है, जो प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत की पराकाष्ठा को पार कर चुका है। जिले के बच्चों और महिलाओं को कुपोषण, कन्या भ्रूण हत्या और घरेलू हिंसा के प्रति जागरूक करने के लिए आया लाखों रुपये का बजट अशोक नगर की सीमाओं को पार कर पड़ोसी जिले गुना की दीवारों पर ‘पोत’ दिया गया। कागजों में चमचमाते स्लोगन लेकिन कथित तौर पर फर्जी बिल-वाउचर और ज़मीन पर सिफ़र काम यह है अशोक नगर महिला एवं बाल विकास विभाग की मौजूदा कार्यप्रणाली का असली चेहरा। इस पूरे खेल की धुरी बनी बैठी हैं विभाग की ज़िला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, जिनके संरक्षण और मौन सहमति के बिना इतना बड़ा सीमा-पार घोटाला संभव ही नहीं था।

 

*सीमाएं लांघ गया भ्रष्टाचार: अशोक नगर का बजट, गुना जिले की दीवारें पुतीं*

 

सरकारी नियमों और प्रशासनिक व्यवस्था का स्पष्ट नियम है कि किसी भी जिले को आवंटित बजट का उपयोग उसी जिले की सीमा, पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में जनजागरूकता फैलाने के लिए किया जाएगा। लेकिन अशोक नगर के महिला एवं बाल विकास अधिकारी के ‘कुशल’ नेतृत्व में विभाग ने नए भौगोलिक समीकरण बना डाले। अशोक नगर के ग्रामीण इलाकों में जहां आंगनवाड़ियों की दीवारें जर्जर हैं, जहां कुपोषण से लड़ रहे बच्चों की माताओं को जागरूक करने के लिए स्लोगन नज़र नहीं आता, वहीं इस विभाग ने लाखों रुपये का भुगतान उन दीवार लेखनों के नाम पर जारी कर दिया जो गुना जिले की सीमाओं में करा दिए गए। सवाल यह उठता है कि क्या अशोक नगर जिले में दीवारों की कमी पड़ गई थी या फिर अधिकारियों और चहेते वेंडरों की मिलीभगत इतनी गहरी हो चुकी है कि उन्हें यह भी ध्यान नहीं रहा कि किस जिले की सीमा कहां खत्म होती है या फिर जानबूझकर दूरदराज और दूसरे जिलों में काम दिखाकर सत्यापन की प्रक्रिया से बचने की शातिर चाल चली गई।

 

 

महिला एवं बाल विकास विभाग का मूल उद्देश्य बाल अधिकार, पोषण अभियान, लाडली लक्ष्मी योजना और महिला सशक्तिकरण का व्यापक प्रचार-प्रसार करना है। इसके लिए हर वर्ष लाखों रुपये का बजट आवंटित होता है, जिसका बड़ा हिस्सा ‘वॉल पेंटिंग’, फ्लेक्स, बैनर और प्रचार सामग्री के मद में खर्च दिखाया जाता है। अशोक नगर में हुआ यह कारनामा साफ इशारा करता है कि कैसे प्रचार-प्रसार केवल अधिकारियों और ठेकेदारों की जेबें भरने का जरिया बनकर रह गया है। विभाग द्वारा ठेकेदारों को लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। भुगतान से पहले जो ‘सत्यापन रिपोर्ट’ लगाई गई, उस पर अधिकारियों ने आंखें मूंदकर दस्तखत क्यों किए जिन स्लोगनों को गांव-गांव की दीवारों पर दिखना चाहिए था, वे सिर्फ फाइलों में दर्ज तस्वीरों तक सीमित रह गए। मामले के उजागर होने के बाद भी जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

 

*महिला एवं बाल विकास अधिकारी पर सीधे सवाल: जवाबदेही से कब तक भागेंगी मैडम फोन तक नहीं उठातीं..?*

 

इस पूरे प्रकरण की सबसे मुख्य धुरी ज़िला महिला एवं बाल विकास अधिकारी की भूमिका है। एक जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी का यह प्राथमिक दायित्व होता है कि वह सरकारी धन के एक-एक रुपये के सही उपयोग की निगरानी करे। क्या मैडम अधिकारी को यह नहीं पता था कि उनके विभाग द्वारा स्वीकृत किए गए कार्य की लोकेशन कहां है अगर भुगतान बिना ज़मीनी निरीक्षण के किया गया, दूसरे जिले में कार्य दिखाकर बिल पास करा लेना किसी निचले कर्मचारी की गलती नहीं हो सकती। इसमें सीधे तौर पर शीर्ष अधिकारी और वेंडर के बीच वित्तीय साठगांठ की बू आ रही है अशोक नगर के जिन क्षेत्रों में कुपोषण का स्तर चिंताजनक है, वहां के लिए आए बजट को दूसरे जिले में ‘कागजी तौर पर’ बहा देना, उन गरीब महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर सीधा डाका है जिनके लिए यह योजनाएं बनाई गई थीं। अशोक नगर का यह दीवार लेखन घोटाला केवल एक तकनीकी या भौगोलिक गलती नहीं है, यह एक सोची-समझी प्रशासनिक धोखाधड़ी है। जनता के टैक्स के पैसे से आए लाखों रुपये को जिस तरह से सीमाओं के पार बहाया गया, वह विभाग के भीतर जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

For Feedback - feedback@example.com
Home Icon Home E-Paper Icon E-Paper Facebook Icon Facebook Google News Icon Google News