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डीसी गैस एजेंसी सील मामला: गोदाम पर ताला लगने के बावजूद प्रशासनिक खामोशी बरकरार गायब सिलेंडरों के आंकड़े पर सस्पेंस……….
नियमों को ताक पर रखकर होटलों, ढाबों पर खपाए जा रहे थे घरेलू एलपीजी सिलेंडर लंबे समय से जारी कालाबाजारी के नेक्सस पर उठे सवाल………..
अशोकनगर। प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई की बड़ी-बड़ी घोषणाओं के बीच ‘डीसी गैस एजेंसी’ का मामला दिन-ब-दिन उलझता नजर आ रहा है। गैस एजेंसी के गोदाम को सील किए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस पूरी कार्रवाई के बाद भी संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन की तरफ से कोई स्पष्ट एवं संतोषजनक जवाब सामने नहीं आया है। गोदाम से कुल कितने रसोई गैस सिलेंडर गायब पाए गए और रिहायशी व व्यावसायिक इलाकों में अवैध रूप से सिलेंडरों का सर्कुलेशन कैसे होता रहा, इन प्राथमिक सवालों पर जिम्मेदार अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। प्रशासन की इस रहस्यमयी खामोशी से न केवल एलपीजी उपभोक्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले की निष्पक्षता और कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शुरुआती जांच और गोदाम की सीलिंग के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि गोदाम में उपलब्ध सिलेंडरों के स्टॉक और आधिकारिक कागजी रिकॉर्ड में भारी अंतर है। कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन ने गोदाम को सील तो कर दिया, लेकिन इसके बाद से गायब सिलेंडरों की वास्तविक संख्या को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है। आशंका जताई जा रही है कि गोदाम से बड़ी संख्या में सिलेंडरों का हेरफेर किया गया है। व्यावसायिक गतिविधियों में सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल वर्षों से जारी था। हालांकि, जब तक प्रशासनिक स्तर पर इसका ठोस ब्योरा जारी नहीं किया जाता, तब तक गायब सिलेंडरों की सटीक संख्या को लेकर संशय बना रहेगा।
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि एजेंसी के गोदाम में सुरक्षित रखे जाने वाले एलपीजी सिलेंडर शहर की विभिन्न व्यावसायिक दुकानों, होटलों और ढाबों पर कैसे सर्कुलेट हो रहे थे। नियमानुसार, घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित और गैर-कानूनी है। कथित तौर पर आरोप है कि डीसी गैस एजेंसी के माध्यम से यह कालाबाजारी लंबे समय से खुलेआम चल रही थी। बिना किसी प्रशासनिक या विभागीय डर के सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडरों को मनमाने दामों पर व्यावसायिक दुकानों तक पहुँचाया जा रहा था। जब प्रशासन ने इस पर दबिश दी और गोदाम को सील किया, तो लोगों को उम्मीद थी कि इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश होगा। लेकिन अभी तक प्रशासन यह बताने में असमर्थ रहा है कि इस अवैध नेटवर्क की जड़ें कहाँ तक फैली हुई हैं और इसके पीछे किन-किन लोगों की संलिप्तता थी। जब इस पूरे घटनाक्रम और उठे सवालों के संबंध में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अधिकारी प्राची शर्मा से उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने मामले पर बेहद संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि सील खोलकर जांच की जाने के बाद ही कितने सिलेंडर कम पाए गए उसकी स्पष्ट जानकारी बताई जा सकेगी । अब देखना यह होगा कि खाद्य विभाग और स्थानीय प्रशासन कब तक इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ता है और प्रभावित उपभोक्ताओं को राहत पहुँचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।





