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आवासीय इलाकों में बेकरियां उगल रही धुआं टोस्ट-ब्रेड बनाने की प्रक्रिया से उठता धुआं, जिम्मेदार विभाग कब करेगा जांच?
बुरहानपुर। शहर के कई शहरी एवं रिहायशी इलाकों में संचालित हो रही बेकरी इकाइयों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। बेकरी में टोस्ट, ब्रेड एवं अन्य खाद्य सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान निकलने वाला धुआं आसपास के वातावरण में फैल रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आवासीय क्षेत्र में इस प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां निर्धारित नियमों और आवश्यक अनुमतियों के अनुरूप संचालित हो रही हैं?
मामला केवल धुएं तक सीमित नहीं है। यदि किसी बेकरी की उत्पादन प्रक्रिया से धुआं, धूल, गंध या अन्य उत्सर्जन आसपास के क्षेत्र में पहुंच रहा है तो संबंधित विभागों को यह जांचना चाहिए कि वहां प्रदूषण नियंत्रण के आवश्यक इंतजाम हैं या नहीं। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के तहत सहित पर्यावरण संबंधी कानूनों के प्रावधान लागू होते हैं।
रिहायशी क्षेत्र में व्यवसाय, नियमों का सवाल
शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यदि बेकरी का संचालन किया जा रहा है तो भवन का उपयोग, स्थानीय निकाय की अनुमति, अग्नि सुरक्षा, खाद्य कारोबार से संबंधित पंजीयन/लाइसेंस तथा प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित आवश्यक अनुमति और शर्तों की जांच जरूरी है।
विशेष रूप से यह देखना जरूरी है कि बेकरी में इस्तेमाल होने वाला ईंधन क्या है, भट्ठी या ओवन की व्यवस्था किस प्रकार की है, धुआं बाहर निकालने के लिए उचित चिमनी या एग्जॉस्ट सिस्टम लगाया गया है या नहीं और उसका उत्सर्जन आसपास के मकानों तक तो नहीं पहुंच रहा।
यदि किसी इकाई में नियमों के अनुरूप प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था नहीं है तो संबंधित विभाग को निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी जरूरी है।
सुबह-शाम धुएं से परेशान तो नहीं
बेकरी में उत्पादन शुरू होने के बाद आसपास के वातावरण में धुआं और गंध महसूस होती है। हालांकि किसी विशेष बेकरी को नियमों का उल्लंघन करने वाला बताने से पहले सक्षम विभाग द्वारा स्थल निरीक्षण और आवश्यक परीक्षण किया जाना जरूरी है।
यही कारण है कि इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठना स्वाभाविक है। विभाग यह पता लगाए कि संबंधित इकाइयां किस श्रेणी में आती हैं और उनके संचालन के लिए कौन-कौन सी अनुमतियां आवश्यक हैं।
खाद्य सुरक्षा भी जांच के दायरे में
बेकरी में केवल धुएं की समस्या ही नहीं, बल्कि खाद्य सामग्री तैयार करने की स्वच्छता और सुरक्षित भंडारण की स्थिति की जांच भी महत्वपूर्ण है। ब्रेड, टोस्ट, बिस्किट एवं अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण में साफ-सफाई, कच्चे माल का सुरक्षित भंडारण, कर्मचारियों की स्वच्छता और तैयार उत्पाद को सुरक्षित तरीके से रखने की व्यवस्था की जांच संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा की जा सकती है।
इसलिए संयुक्त रूप से जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि बेकरी इकाइयां खाद्य सुरक्षा, स्थानीय निकाय और पर्यावरणीय आवश्यकताओं का पालन कर रही हैं या नहीं।
विभागीय जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
सवाल यह नहीं कि शहर में बेकरी क्यों संचालित हो रही हैं। सवाल यह है कि वे किन शर्तों के आधार पर संचालित हो रही हैं और क्या उन शर्तों का पालन हो रहा है?
यदि सभी आवश्यक अनुमति मौजूद हैं और प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन किया जा रहा है तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वहीं यदि किसी इकाई में कमियां मिलती हैं तो संबंधित नियमों के तहत सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
पर्यावरण मंत्रालय भी वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्धारित मानकों और उद्योगों के उत्सर्जन नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर देता है।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग तक उठे सवाल
आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक इकाइयों को लेकर की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। संबंधित विभाग को यह देखना चाहिए कि जिस भवन में बेकरी संचालित हो रही है, उसका उपयोग स्वीकृत नियमों के अनुरूप है या नहीं।
वहीं प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों को यह देखना चाहिए कि बेकरी की उत्पादन प्रक्रिया से कोई ऐसा उत्सर्जन तो नहीं हो रहा जो निर्धारित मानकों के विपरीत हो।
जरूरत पड़ने पर मौके से संबंधित नमूने या उत्सर्जन संबंधी परीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जा सकती है।
जनहित में हो संयुक्त निरीक्षण
लोगों की परेशानी को देखते हुए प्रशासन को शहर के ऐसे क्षेत्रों में संचालित बेकरी इकाइयों का सर्वे कराना चाहिए जहां आसपास घनी आबादी है। जांच के दौरान लाइसेंस, भवन उपयोग, अग्नि सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा तथा पर्यावरणीय अनुपालन की स्थिति देखी जा सकती है।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जिन बेकरी इकाइयों में टोस्ट-ब्रेड या अन्य उत्पादों के निर्माण के दौरान धुआं निकलता है, उनके लिए धुआं नियंत्रण और निकासी की क्या व्यवस्था अनिवार्य है।
कार्रवाई से पहले तथ्य, कार्रवाई के बाद पारदर्शिता
इस मामले में किसी भी कारोबारी को बिना जांच दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन मामले को नजरअंदाज करना भी जनहित में नहीं है। इसलिए प्रशासन को तथ्यात्मक जांच कर रिपोर्ट सामने लानी चाहिए।
क्या शहर और रिहायशी इलाकों में संचालित बेकरी इकाइयों का नियमित निरीक्षण होता है? क्या सभी आवश्यक अनुमति मौजूद हैं? क्या उत्पादन प्रक्रिया से निकलने वाले धुएं की जांच की गई है? क्या संबंधित इकाइयों में निर्धारित प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था लगी है?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
यदि नियमों का पालन हो रहा है तो बेकरी संचालकों को बेवजह परेशानी नहीं होनी चाहिए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन मिलता है तो संबंधित विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। यही पारदर्शी और कानूनसम्मत व्यवस्था होगी।





