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श्रावण मास में भगवान शंकर की महिमा का बखान, शिवतत्व और शिवोपासना पर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि का आध्यात्मिक प्रवचन
जबलपुर। पवित्र श्रावण मास के अवसर पर जबलपुर के समीप स्थित श्री पारदेश्वर पीठम्, रेनकूट में भगवान पारदेश्वर महादेव के मास पर्यंत पूजन एवं अभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में तपोनिधि निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर एवं हरिद्वार स्थित भारत माता मंदिर के ट्रस्टी स्वामी श्री अखिलेश्वरानंद गिरि महाराज का तीन दिवसीय आगमन हुआ। पीठ परिसर में प्रतिदिन शाम 7 बजे आयोजित सत्संग में स्वामी जी द्वारा भगवान शिव की महिमा, शिवतत्व एवं शिवोपासना विषय पर सारगर्भित प्रवचन दिए गए।
शिवलिंग के प्राकट्य और शिवोपासना का रहस्य बताया
प्रवचन के दौरान स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि महाराज ने शिव रहस्य, शिवलिंग के प्राकट्य एवं शिवोपासना के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सृष्टि के आरंभ में भगवान ब्रह्मा और विष्णु के मध्य हुए संवाद तथा पृथ्वी पर स्तंभाकार दिव्य ज्योति पुरुष के प्रादुर्भाव से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए शिवलिंग पूजन की महत्ता समझाई।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव दयालु, करुणामय और क्षमाशील स्वरूप हैं। वे अपने भक्तों की सच्ची प्रार्थना से शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं। श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का विशेष और पवित्र अवसर है।
‘शिव महिम्न स्तोत्र’ के माध्यम से शिव की अनंत महिमा का वर्णन
स्वामी जी ने गंधर्वराज पुष्पदंत से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए प्रसिद्ध ‘शिव महिम्न स्तोत्र’ के श्लोकों के माध्यम से भगवान शिव की अनंत महिमा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव की महिमा का पूर्ण वर्णन करना स्वयं देवी शारदा के लिए भी संभव नहीं है। शिव की महिमा अनंत और अपरिमित है।
विभिन्न शिवलिंगों की पूजा के महत्व पर प्रकाश
प्रवचन के दौरान स्वामी जी ने विभिन्न प्रकार के शिवलिंगों की उपासना एवं उनके धार्मिक महत्व की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पार्थिव शिवलिंग अर्थात मिट्टी से निर्मित हस्तनिर्मित शिवलिंग के पूजन को विशेष महत्व बताया। इसके साथ ही स्फटिक, पारद तथा नर्मदा नदी से प्राप्त नर्मदेश्वर शिवलिंग की महिमा पर भी प्रकाश डाला।
शिवतत्व के दार्शनिक एवं आध्यात्मिक पक्ष की व्याख्या
प्रवचन के अंतिम दिन स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि महाराज ने शिवपुराण, उपनिषदों तथा कैलास पर्वत पर शिव-पार्वती संवाद पर आधारित ‘शिव गीता’ के प्रसंगों के माध्यम से शिवतत्व के दार्शनिक एवं भावनात्मक पक्ष की व्याख्या की। उन्होंने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठित द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, पूजन, अभिषेक एवं स्मरण की महिमा भी बताई।
उन्होंने कहा कि श्रावण मास भगवान शंकर की आराधना का पवित्र अवसर है। इस दौरान की गई शिव आराधना और उपासना कभी व्यर्थ नहीं जाती। रुद्राक्ष धारण करने, पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करने तथा मस्तक पर त्रिपुंड धारण करने के महत्व पर भी उन्होंने विस्तार से प्रकाश डाला।
शिव आराधना में सभी को समान अधिकार
स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि महाराज ने कहा कि भगवान शंकर देवाधिदेव हैं और उन्होंने अपनी आराधना का अधिकार सभी को समान रूप से प्रदान किया है। स्त्री-पुरुष, साधु-संत, देव, दानव, मानव, यक्ष, गंधर्व, नाग और किन्नर सहित सभी भगवान शिव की उपासना करते हैं।
उन्होंने भगवान शिव की व्यापकता और सर्वसमावेशी स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहा कि शिव का स्मरण एवं नामोच्चार जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करता है।
तीन दिवसीय प्रवचन के दौरान उपस्थित श्रद्धालु शिवभक्ति एवं आध्यात्मिक भाव-विभोर वातावरण में डूबे रहे और उन्होंने शिवोपासना से जुड़े आध्यात्मिक एवं जीवनोपयोगी संदेशों का लाभ लिया।





