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वार्डों में खुले में बह रहा सेप्टिक टैंक का अपशिष्ट, स्वच्छता व्यवस्था पर उठे सवाल
नालियों में बहते गंदे अपशिष्ट से दुर्गंध और बीमारी की आशंका, नागरिकों ने सम्बंधित विभाग से प्रभावी कार्रवाई की मांग
बुरहानपुर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र और राज्य सरकारें स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। इसके बावजूद बुरहानपुर जिले के कुछ वार्डों में घरों के सेप्टिक टैंकों (सेफ्टी टैंक) से निकलने वाले अपशिष्ट के खुले नालों में बहाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि इससे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी हुई है।
नागरिकों के अनुसार कई स्थानों पर सेप्टिक टैंकों का अपशिष्ट उचित वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करने के बजाय सीधे नालियों में छोड़ा जा रहा है। इससे नालियों का पानी प्रदूषित हो रहा है और आसपास रहने वाले लोगों को बदबू के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राहगीरों कहना है कि कई स्थानों पर दुर्गंध के कारण कुछ देर खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है।
लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। गंदगी के कारण मच्छरों की संख्या बढ़ने और डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड तथा अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह जनस्वास्थ्य का गंभीर विषय बन सकता है।
लोगों का कहना है कि सम्बंधित विभाग द्वारा नियमित सफाई और स्वच्छता के दावे किए जाते हैं, लेकिन कई वार्डों में स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। लोगों ने मांग की है कि संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण कर यह जांच की जाए कि कहीं सेप्टिक टैंकों का अपशिष्ट अवैध रूप से नालियों में तो नहीं छोड़ा जा रहा। यदि ऐसा पाया जाता है तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मानव अपशिष्ट का वैज्ञानिक और सुरक्षित निस्तारण अत्यंत आवश्यक है। इसे खुले नालों में बहाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि जलजनित और संक्रामक बीमारियों के प्रसार का कारण भी बन सकता है। इसलिए स्वच्छता संबंधी नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी वार्डों का सर्वे कराया जाए, नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, सेप्टिक टैंकों की मशीनों से सुरक्षित सफाई और अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था लागू की जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही लोगों को भी जागरूक किया जाए कि वे किसी भी प्रकार का अपशिष्ट खुले नालों में न बहाएं।





