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छात्रावास निर्माण सवालों के घेरे में! गुणवत्ता परीक्षण के बिना ही चढ़ रही इमारत?

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खबरवाणी

छात्रावास निर्माण सवालों के घेरे में! गुणवत्ता परीक्षण के बिना ही चढ़ रही इमारत?

लेब को लेकर विभागीय इंजीनियर और कंपनी के इंजीनियर का अलग अलग दावा

प्लिंथ लेवल तक पहुंचा निर्माण, लेकिन टेस्टिंग का रिकॉर्ड और व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल; पीआईयू की निगरानी और ठेकेदार की जवाबदेही कटघरे में

 

भौंरा। संदीपनी विद्यालय शाहपुर परिसर में लगभग 4 करोड़ की लागत से बन रहे 100 सीटर छात्रावास के निर्माण कार्य को लेकर एक के बाद एक नए सवाल सामने आ रहे हैं। पहले सुरक्षा व्यवस्थाओं में लापरवाही, फिर सूचना बोर्ड का अभाव, उसके बाद कंपाउंड वॉल की गुणवत्ता पर सवाल और अब निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच (क्वालिटी टेस्टिंग) को लेकर गंभीर आशंकाएं सामने आई हैं। निर्माण कार्य प्लिंथ लेवल तक पहुंच चुका है, लेकिन मौके पर गुणवत्ता परीक्षण की कोई स्पष्ट व्यवस्था दिखाई नहीं देने से पूरे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिस भवन की नींव और प्रारंभिक ढांचा करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है, उसकी मजबूती सुनिश्चित करने वाले परीक्षण आखिर कहां और कैसे किए जा रहे हैं? यदि परीक्षण हुए हैं तो उनकी रिपोर्ट क्या है, किस प्रयोगशाला में जांच कराई गई, किस अधिकारी ने सत्यापित किया और उसका रिकॉर्ड कहां उपलब्ध है? निर्माण स्थल पर इन सवालों का कोई स्पष्ट उत्तर नजर नहीं आता।

निर्माण कार्य भोपाल की राधे-राधे कंस्ट्रक्शन द्वारा किया जा रहा है, जबकि तकनीकी निगरानी की जिम्मेदारी परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) पर है। ऐसे में सवाल केवल ठेकेदार पर ही नहीं, बल्कि विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी खड़े हो रहे हैं। सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता परीक्षण केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि पूरी परियोजना की विश्वसनीयता का आधार माना जाता है। निर्धारित मानकों के अनुसार सीमेंट, स्टील, रेत, गिट्टी और कंक्रीट सहित निर्माण सामग्री का नियमित परीक्षण, परीक्षण अभिलेखों का संधारण और विभागीय इंजीनियरों द्वारा उसका सत्यापन आवश्यक प्रक्रिया का हिस्सा होता है।

अब सबसे अहम सवाल यह है कि प्लिंथ लेवल तक पहुंच चुके निर्माण के दौरान पीआईयू के अधिकारियों ने कितनी बार निरीक्षण किया? क्या गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट देखी गई? क्या किसी प्रकार की कमी दर्ज की गई? यदि हां, तो ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? इन सभी बिंदुओं पर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

यह भी उल्लेखनीय है कि इसी निर्माण कार्य में पहले भी बारिश के दौरान खुले बिजली के तारों के बीच काम कराए जाने, मजदूरों की सुरक्षा में लापरवाही, सूचना बोर्ड नहीं लगाए जाने तथा कंपाउंड वॉल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ चुके हैं। लगातार सामने आ रही शिकायतें इस परियोजना की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही हैं।

यदि निर्माण कार्य पूरी तरह निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जा रहा है तो संबंधित विभाग और ठेकेदार को गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट, निरीक्षण रजिस्टर तथा तकनीकी अभिलेख सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। पारदर्शिता ही इन सभी सवालों का सबसे प्रभावी जवाब हो सकती है।

 

इनका कहना

निर्माण स्थल पर लेब उपलब्ध है मटेरियल टेस्टिंग के बाद ही निर्माण कार्य किया जा रहा है

 

प्रदीप डोगंरे पी आई यू

 

 

निर्माण स्थल पर जगह नहीं होने के कारण लेब नहीं चालू नहीं हो पाई है इसलिए काम रोक दिया गया है

 

वीरेन्द्र जैन

इंजीनियर राधे राधे कंस्ट्रक्शन

इंजीनियर

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