खबरवाणी
वन भूमि पर अवैध सड़क निर्माण और अतिक्रमण के गंभीर आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता जितेंद्र रावतोले ने वनमंडलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की उठाई मांग
बुरहानपुर। शाहपुर वनपरिक्षेत्र के चौंडी बीट में वन भूमि पर कथित रूप से अवैध सड़क निर्माण, अतिक्रमण और वन भूमि के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। इस संबंध में शिकायतकर्ता जितेंद्र रावतोले ने वनमंडलाधिकारी, बुरहानपुर को विस्तृत लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शाहपुर वनपरिक्षेत्र की चौंडी बीट के कक्ष क्रमांक 415 में सिंगारूड़ नदी के समीप बिना स्पष्ट आवश्यकता और सक्षम स्वीकृति के एक सड़क का निर्माण कराया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस क्षेत्र में यह सड़क बनाई गई है, वहां पहले से कथित रूप से वन भूमि पर अतिक्रमण मौजूद है। ऐसे में आशंका व्यक्त की गई है कि सड़क निर्माण से अतिक्रमणकारियों को सुविधा पहुंचाने का प्रयास किया गया हो, जिससे भविष्य में वन भूमि पर अतिक्रमण और बढ़ सकता है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि वन भूमि पर बिना विधिवत अनुमति के सड़क का निर्माण किया गया है, तो यह शासन की संपत्ति एवं वन संसाधनों के संरक्षण से जुड़े नियमों का विषय हो सकता है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि सड़क निर्माण की प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, निर्माण का उद्देश्य, लागत तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तार से जांच कराई जाए।
शिकायत के अनुसार चौंडी बीट के कक्ष क्रमांक 416 में बीएसएनएल टावर के पास वन भूमि पर कथित रूप से अतिक्रमण कर उसे खेती के लिए उपयोग में लिया जा रहा है। आरोप है कि उक्त भूमि पर गंगाफल की खेती की जा रही है। इसके अतिरिक्त आवासीय टावर के आसपास भी वन भूमि पर खेती किए जाने का उल्लेख शिकायत में किया गया है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह वन भूमि के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए गंभीर विषय है।
जितेंद्र रावतोले ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि कुछ स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार कर्मचारियों की लापरवाही अथवा मिलीभगत के कारण अतिक्रमणकारियों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि इस संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विभाग निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।
शिकायतकर्ता ने वन विभाग से मांग की है कि संबंधित क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए, निर्माण कार्य एवं अतिक्रमण की वैधानिक स्थिति की जांच की जाए तथा यदि किसी प्रकार का नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो दोषियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, वन (संरक्षण) अधिनियम तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्राप्त शिकायत-पत्र के अनुसार यह आवेदन 2 जुलाई 2026 को वनमंडलाधिकारी (सा.) बुरहानपुर को सौंपा गया है। इसकी प्रतिलिपि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वनबल प्रमुख) भोपाल, मुख्य वन संरक्षक खंडवा वृत्त तथा उपवनमंडलाधिकारी, बुरहानपुर को भी भेजी गई है, ताकि मामले पर उच्च स्तर से भी संज्ञान लिया जा सके।
विभागीय जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट
वन भूमि पर अवैध निर्माण, अतिक्रमण अथवा खेती जैसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही तय होता है। यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप निराधार सिद्ध होते हैं तो संबंधित पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।
वन भूमि पर्यावरण एवं जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में वन क्षेत्र में होने वाले किसी भी निर्माण या भूमि उपयोग परिवर्तन के संबंध में विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। शिकायतकर्ता ने वन विभाग से अपेक्षा जताई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वन भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा भविष्य में किसी भी प्रकार के अवैध अतिक्रमण एवं अनियमित निर्माण पर प्रभावी रोक लगाई जाए।





