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लोकतंत्र की हत्या………. कांग्रेस का देशव्यापी आक्रोश, आमला में फूटा गुस्सा
आमला। राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर बवाल; ढोल-नगाड़ों के साथ निकाला
जुलूस, पुलिस से तीखी झड़प के बाद फूंका चुनाव आयुक्त का पुतला, तहसीलदार को सौंपा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन
आमला। मध्य प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा सदस्य चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन नियम विरुद्ध तरीके से रद्द किए जाने के मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस कथित चुनावी धांधली और तानाशाही के विरोध में आज आमला शहर पूरी तरह राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। आमला नगर पालिका अध्यक्ष और कद्दावर कांग्रेस नेता अजय सिंह सोलंकी के नेतृत्व में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी और शहर कांग्रेस कमेटी ने केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक ऐतिहासिक और उग्र प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का साफ आरोप है कि चुनाव आयोग ने सत्तापक्ष के दबाव में आकर जानबूझकर यह असंवैधानिक कदम उठाया है।
ढोल-नगाड़ों के साथ उग्र प्रदर्शन, वाटर कैनन से रुकीं कांग्रेसी लहरें
शनिवार दोपहर को स्थानीय कांग्रेस कार्यालय से अजय सिंह सोलंकी की अगुवाई में सैकड़ों कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों के साथ सड़कों पर उतर आए। कार्यकर्ताओं के हाथों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तख्तियां और पुतले थे। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए यह विशाल जुलूस मुख्य मार्गों से होता हुआ तहसील कार्यालय की ओर बढ़ा। प्रदर्शन की उग्रता को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। जैसे ही कांग्रेसियों ने मुख्य चौराहे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंकने का प्रयास किया, वैसे ही पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया। तेज पानी की बौछारों के बीच भी कांग्रेसी डटे रहे और उन्होंने जलती हुई लपटों के बीच चुनाव आयुक्त का पुतला दहन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन, निष्कासन की मांग
पुतला दहन के बाद उपजे भारी हंगामे के बीच नगर पालिका अध्यक्ष अजय सिंह सोलंकी और कांग्रेस पदाधिकारियों ने आमला तहसीलदार रिचा कौरव को महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक लिखित ज्ञापन सौंपा। सौंपे गए पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि एक साधारण गांधीवादी महिला (मीनाक्षी नटराजन) का जिस प्रकार से नामांकन निरस्त किया गया है, वह पूरी तरह से निंदनीय और चिंता का विषय है। अजय सोलंकी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “लोकतंत्र की मजबूती हमेशा निष्पक्ष और स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं पर निर्भर करती है। लेकिन आज इन संस्थाओं की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यदि देश का लोकतंत्र और संविधान ही खतरे में पड़ जाएगा, तो आम जनता का भरोसा उठ जाएगा।” कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मांग की है कि लोकतंत्र विरोधी इस कृत्य के लिए जिम्मेदार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल प्रभाव से उनके पद से निलंबित या बर्खास्त किया जाए।
सत्ता के दबाव में काम कर रहा चुनाव आयोग: कांग्रेस
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नामांकन फॉर्म में ऐसी कोई बड़ी तकनीकी खामी या कॉलम खाली नहीं था जिसे सुधारा न जा सके। यदि कोई छोटी-मोटी मानवीय भूल थी भी, तो नियमानुसार उसे सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए था, लेकिन चुनाव आयोग ने जानबूझकर ऐसा नहीं किया। यह पूरी तरह से प्रमाणित करता है कि चुनाव आयुक्त ने पूरी तरह भाजपा के दबाव और लालच में आकर यह पक्षपातपूर्ण कार्य किया है। अजय सोलंकी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस तानाशाही के खिलाफ तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो कांग्रेस पार्टी इस आंदोलन को ब्लॉक स्तर से उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर ले जाएगी और सड़कों पर उग्र आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई और महिला कांग्रेस के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।





