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भगवान श्रीकृष्ण एवं सुदामा प्रसंग की कथा सुनाई,भंडारा प्रसादी में अंतिम दिन उमड़ा जन सैलाब

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खबरवाणी

भगवान श्रीकृष्ण एवं सुदामा प्रसंग की कथा सुनाई,भंडारा प्रसादी में अंतिम दिन उमड़ा जन सैलाब

मुलताई। पवित्र नगरी मुलताई में अग्रवाल परिवार द्वारा प्रसिद्ध कथा वाचक देवकी नंदन ठाकुर के सानिध्य में आयोजित कथा में अंतिम दिन शुक्रवार को श्रीमद भागवत कथा सुनाते हुए युवाओं को कहा भगवान राम,श्रीकृष्ण से सीखो भगवान 3.35 बजे बिस्तर छोड़ देते है,आपकी दिनचर्या बदलकर सनातन धर्म के सिद्धांतो का कुछ तो पालन करे। अगर राम को मानते हो राम की मानो, श्रीकृष्ण को मानते हो कृष्ण को मानो, भागवत को मानते हो मानो गुरु को मानते हो उसकी मानो तभी तुम्हारा जीवन प्रकाशमान होगा।लेकिन हमारे शरीर में काम क्रोध ईर्ष्या भरी हुई है,मन की बुराई दूर करो, मन को साफ करो फिर ये कथा तुम्हे अच्छी लगेगी, ये कथा तुम्हारे शरीर में चलती रहेगी, कथा से एक अच्छाई अपना लो। मोबाईल पर हेलो की जगह राधे राधे बोलो।आप हिन्दू हो तो माथे से तिलक मत मिटने देना। उन्होंने भगवान सुदामा एवं कृष्ण की मित्रता का प्रसंग सुनाते है कहा अच्छे लोगो की मित्रता रखना।द्वारका आने पर सुदामा को काटा लगा तो भगवान श्रीकृष्ण को पता चला तो वे दौड़े चले आए एवं सुदामा के पैर से कांटा निकालने लगे लेकिन सुदामा ने कहा नही आप नही निकाले तो भगवान ने कहा गरीब ब्राम्हण के पैर से काटना निकालने से छोटा नही होगा, लेकिन कन्हैया से हाथो से कांटा नही निकला तो भगवान ने सुदामा के पैरो से मुंह से कांटा निकाला।सुदामा जी जब पाठ भूल गए तो गुरु ने दोनो के लिए एक एक मुठ्ठी चना दे दिए,जब भूख लगे तब खा लेना।सुदामा को भूख लगी तो उन्होंने कृष्ण का भी चना खा लिया, कभी दुसरो का हिस्सा नही खाना, दोनों ने शिक्षा ग्रहण की कृष्ण जी द्वारकाधीश बन गए, सुदामा की शादी हो गई,उन्हें परिस्थितियों ने घेर लिया उनके घर में खाने के लिए कुछ नही बचा।सुखी रहना चाहते है उसी में खुश रहो। उनकी पत्नी ने कहा तुम श्रीकृष्ण के पास जाओ तो सुदामा महल पहुंचे, सुदामा के महल पहुंचने पर श्रीकृष्ण दौड़ कर गेट पर पहुंचे कृष्ण और सुदामा के पैर पकड़ लिए,सुदामा के दो मुट्ठी तंदुल (चावल) खाकर उसे दो लोक की सम्पति दे दी।कथा तो बहुत लंबी है। कथा सुनने अपने बच्चो को लेकर जाना चाहिए, सिर्फ भगवान को ही प्रणाम करना चाहिए,महिलाए भगवान के मंदिर में बाल खुले कर चली जाती है, जो अशुभ है। यदुवंशी लोग भगवान के कुल के है लेकिन उनके वंशजो ने ब्रह्मणो का उपहास किया।जिससे उन्हें ब्रह्मणो ने श्राप दिया, जिन्हे श्रीकृष्ण बचा सकते थे, लेकिन श्रीकृष्ण ने उन्हें नही बचाया क्योंकि उन्होंने ब्राम्हण ऋषि मुनियो का उपहास किया।उन्होंने कहा की समय की मांग है की सनातनी बोर्ड बनना चाहिए, जिसका अध्यक्ष चारो शंकराचार्य में से एक को बनाना चाहिए। कथा के समापन अवसर पर भंडारा प्रसादी का आयोजन किया गया, जिसमे हजारों श्रद्धालुओं भंडारा प्रसादी ग्रहण की।

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