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धूल-मिट्टी और प्रदूषण के बीच बिक रहा तेल, जनता की सेहत से खिलवाड़ का खतरा
बुरहानपुर। शहर में खुले रूप से बिक रहे खाने के तेल की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। संचालित तेल गोदामों और थोक विक्रेताओं के यहां खुले टैंकरों एवं टंकियों में तेल के भंडारण और बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि खुलेआम तेल की टंकियों और कंटेनरों के ऊपर धूल-मिट्टी की मोटी परत जमी रहती है, जिससे तेल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
शहर में बढ़ते धूल और प्रदूषण के बीच खुले वातावरण में रखे जाने वाले खाद्य तेल को लेकर नागरिकों में चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार खाद्य पदार्थों के भंडारण और परिवहन में स्वच्छता के मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक होता है। यदि खाद्य तेल धूल, मिट्टी या अन्य बाहरी तत्वों के संपर्क में आता है तो उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
गुणवत्ता जांच की मांग तेज
शहरवासियों का कहना है कि खाद्य तेल के बड़े गोदामों और थोक विक्रेताओं के यहां समय-समय पर गुणवत्ता जांच होना आवश्यक है। नागरिकों ने मांग की है कि खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण कर तेल के नमूने लिए जाएं और उन्हें मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण हेतु भेजा जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बाजार में बिक रहा तेल निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।
लोगों का कहना है कि खाद्य पदार्थों से जुड़ा मामला सीधे जनता के स्वास्थ्य से संबंधित है, इसलिए जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और सख्ती दोनों आवश्यक हैं।
स्वच्छता व्यवस्था पर भी उठ रहे प्रश्न
कई स्थानों पर तेल भंडारण स्थलों की साफ-सफाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि यदि खाद्य सामग्री के भंडारण स्थल पर पर्याप्त स्वच्छता नहीं होगी तो प्रदूषण और दूषित तत्वों के खाद्य पदार्थों में पहुंचने का खतरा बना रहेगा।
खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार खाद्य पदार्थों के भंडारण, परिवहन और बिक्री के दौरान स्वच्छता एवं सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना आवश्यक है। ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
मिलावट की आशंका पर जांच जरूरी
शहर में चर्चा का विषय यह भी बना हुआ है कि खुले तेल की बिक्री में कहीं किसी प्रकार की मिलावट तो नहीं हो रही है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नागरिकों का कहना है कि शंकाओं को दूर करने के लिए नियमित सैंपलिंग और प्रयोगशाला जांच जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता को लेकर संदेह की स्थिति में वैज्ञानिक परीक्षण ही सत्यता सामने ला सकता है। इसलिए संबंधित विभाग को समय-समय पर नमूने लेकर जांच करवानी चाहिए।
निरीक्षण और कार्रवाई में पारदर्शिता की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा निरीक्षण या कार्रवाई की जाती है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे जनता का विश्वास बढ़ेगा और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।
नागरिकों ने मांग की है कि शहर के सभी खाद्य तेल गोदामों, थोक विक्रेताओं और खुले तेल बेचने वाले प्रतिष्ठानों का विशेष अभियान चलाकर निरीक्षण किया जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता सीधे तौर पर आम नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। ऐसे में आवश्यक है कि खाद्य तेल के भंडारण, परिवहन और बिक्री में निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन हो। शहरवासियों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग इस विषय को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक जांच और निरीक्षण कराएगा ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य तेल उपलब्ध हो सके।





