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भ्रष्टाचार…. ग्राम सासबड़ लोकतंत्र पर भारी ‘कमीशनतंत्र’, बिना जरूरत बना दी 5 लाख की पुलिया
आमला । जनपद पंचायत में जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों की मिलीभगत से शासकीय खजाने में सेंध; ग्रामीणों के विरोध को राजनीतिक रसूख ने कुचला
आमला। जनपद पंचायत आमला के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में इन दिनों विकास कार्यों के नाम पर ‘सरकारी लूट’ का खुला खेल चल रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासन के बीच ऐसा गठजोड़ बना है कि नियम-कायदे ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं। ताजा मामला ग्राम पंचायत सासबड़ का है, जहाँ शासन की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 5वे वित्त आयोग के अंतर्गत 5 लाख रुपये की राशि से एक ऐसी पुलिया खड़ी कर दी गई है, जिसकी धरातल पर कोई आवश्यकता ही नहीं थी।
शासकीय राशि केकिया गया दुरुपयोग, ग्रामीणों की शिकायतें रद्दी की टोकरी में
ग्राम पंचायत सासबड़ में इस पुलिया का निर्माण 5वें वित्त आयोग के अंतर्गत प्राप्त 5 लाख रुपये की राशि से किया गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस स्थान पर यह पुलिया बनाई गई है, वहां इसकी कोई आवश्यकता ही नहीं थी। क्योंकि पुलिया निर्माण के स्थान के आसपास की लगभग 2 एकड़ शासकीय आई टी आई के लिए प्रशासन द्वारा निरीक्षण किया गया है आने वाले समय में स्वीकृत प्राप्त होती हैं। पूरा क्षेत्र आई टी आई कैंपस बने से पुलिया अनुपयोगी हो जाएगी वर्तमान में भी ग्रामीणों का आवागमन पुलिया से नहीं होता है पुलिया निर्माण के स्थान पर यदि गांव की आंतरिक सड़कों या पेयजल व्यवस्था पर यह राशि खर्च की जाती, तो जनता को सीधा लाभ मिलता। जब इस गैर-जरूरी निर्माण कार्य की भनक ग्रामीणों को लगी, तो उन्होंने काम शुरू होने से पहले ही इसका कड़ा विरोध किया था। ग्रामीणों ने वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर जनपद पंचायत तक लिखित शिकायतें भी दर्ज कराईं और मांग की कि इस फिजूलखर्च को तुरंत रोका जाए।
निर्माण कार्य का विरोध की बावजूद भी राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते बनी पुलिया
पुलिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों स्थानीय संदीप वाईकर, विशाल पवार, गोलू सोलंकी , दिपक रावत सहित अन्य ग्रामीणों चर्चा में बताया कि निर्माण कार्य के समय पुलिया निर्माण न किए जाने एवं राशि से अन्य विकास कार्य किए जाने हेतु ग्रामीणों द्वारा लगातार विरोध किए जाने के बावजूद भी निर्माण कार्य नहीं रोका गया इसमें मुख्य रूप से निर्माण कार्य एजेंसी के साथ मिलकर जिला पंचायत सदस्य पति के राजनीतिक हस्तक्षेप माना जा रहा है।जिसके के दबाव में प्रशासनिक अधिकारी भी आंखें मूंदे बैठे रहे। अधिकारियों ने धरातल पर जाकर यह जांचना भी उचित नहीं समझा कि क्या वाकई इस पुलिया की वहां जरूरत है या नहीं। जिला पंचायत सदस्य पति के दबाव के आगे पूरा प्रशासनिक अमला नतमस्तक नजर आया, जिसके चलते ग्रामीणों की जायज आवाजों को दबा दिया गया और देखते ही देखते यह अनुपयोगी ढांचा खड़ा कर सरकारी राशि का बंदरबांट कर दिया गया। स्थानीय निवासियों में अब इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि उनके टैक्स के पैसे का इस्तेमाल जनता की भलाई के बजाय नेताओं की जेबें भरने के लिए किया जा रहा
है।
कमीशन का गणित खुद ‘ठेकेदार’ बने जनप्रतिनिधि
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायतों में जो जनप्रतिनिधि अपने प्रभाव से निर्माण कार्यों की स्वीकृति ला रहे हैं, वे भारी-भरकम कमीशन की चाह में खुद ही ठेकेदार बन बैठे हैं। पंचायतों में सरपंच-सचिव को दरकिनार कर ये रसूखदार लोग सीधे निर्माण कार्यों का हिस्सा संभाल रहे हैं। सासबड़ की इस पुलिया का निर्माण भी बिना किसी तकनीकी योजना और जरूरत के सिर्फ इसलिए कराया गया ताकि सरकारी बजट को ठिकाने लगाकर अपनी जेबें भरी जा सकें।
इनका कहना है
ग्राम पंचायत सासबड़ सरपंच
सुभाष घीडोडे
9165931783
फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास सरपंच महोदय द्वारा फोन नहीं उठाया जा रहा है
इनका कहना है
जनपद पंचायत उप यंत्री
अमित तिवारी
ग्राम का मोक्ष धाम जाने का मार्ग है यह निर्माण कार्य जिला मद से हुआ था
इनका कहना है
ग्राम पंचायत सासबड़ पटवारी
कमलेश जेशवाल
काली मंदिर के जाने वाले मार्ग के भूमि लगभग 2 एकड़ आईटीआई निर्माण हेतु स्वीकृति के लिए भेजी गई है अगर स्वीकृति प्राप्त होती है तो वहां पर आईटीआई निर्माण कार्य कराया जाएगा






