देश में एक बार फिर कोरोना महामारी जैसी चिंता बढ़ती नजर आ रही है। इस बार खतरा इबोला वायरस को लेकर मंडरा रहा है। हालांकि भारत में अभी तक इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन केंद्र सरकार ने पहले से ही पूरी तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने अधिकारियों के साथ बड़ी बैठक कर हालात का जायजा लिया और जरूरी निर्देश जारी किए। वहीं DGCA ने भी एयरपोर्ट और एयरलाइंस के लिए सख्त SOP लागू कर दी है।
इबोला को लेकर सरकार हुई चौकन्नी
सरकार किसी भी तरह का रिस्क लेने के मूड में नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एयरपोर्ट, बंदरगाह और बॉर्डर एंट्री पॉइंट्स पर निगरानी तेज कर दी है। यात्रियों की स्क्रीनिंग और हेल्थ चेकअप लगातार किया जाएगा। मंत्रालय ने साफ कहा है कि देश में अभी इबोला का एक भी केस नहीं मिला है, लेकिन सुरक्षा में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। कोरोना के समय हुई परेशानियों से सबक लेते हुए इस बार पहले से तैयारी की जा रही है।
ICMR और NCDC को दिए गए खास निर्देश
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR और NCDC को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है। ट्रैकिंग, टेस्टिंग और सर्विलांस सिस्टम को एक्टिव रखा जाएगा ताकि अगर कहीं कोई संदिग्ध मामला मिले तो तुरंत कार्रवाई हो सके। सरकार चाहती है कि बीमारी फैलने से पहले ही उस पर लगाम लगा दी जाए। यही वजह है कि हर राज्य को भी सतर्क रहने के आदेश दिए गए हैं।
WHO की चेतावनी के बाद बढ़ी टेंशन
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने इबोला को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। अफ्रीका के कई देशों खासकर युगांडा और कांगो में इबोला तेजी से फैल रहा है। इसके बाद भारत सरकार की चिंता बढ़ गई है। DGCA ने एयरलाइंस को कोविड काल जैसी सावधानियां अपनाने के निर्देश दिए हैं। एयरपोर्ट पर हेल्थ डेस्क और मेडिकल टीम को भी एक्टिव कर दिया गया है।
एयरलाइंस को मास्क और PPE किट रखने का आदेश
सरकार ने 20 से ज्यादा एयरलाइंस को सख्त निर्देश दिए हैं। यात्रियों को फ्लाइट में ही सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा। अगर किसी यात्री को बुखार, उल्टी, दस्त, कमजोरी या शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं तो उसे तुरंत अलग बैठाया जाएगा। एयरलाइंस को मास्क, ग्लव्स, सैनिटाइजर और PPE किट रखने के आदेश दिए गए हैं ताकि इमरजेंसी में तुरंत इस्तेमाल किया जा सके।
पहले भी हजारों लोगों की जान ले चुका है इबोला
इबोला कोई नई बीमारी नहीं है। यह बेहद खतरनाक वायरस माना जाता है। साल 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में इबोला ने भारी तबाही मचाई थी। उस दौरान 11 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इबोला वायरस पहली बार 1976 में दक्षिण सूडान और कांगो के पास इबोला नदी क्षेत्र में पाया गया था। इसी नदी के नाम पर इस वायरस का नाम रखा गया। अब एक बार फिर दुनिया में इसका खतरा बढ़ने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
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