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जांच टीम पहुंचने से पहले बंद हो गया मेडिकल!

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खबरवाणी

जांच टीम पहुंचने से पहले बंद हो गया मेडिकल!

आदिवासी अंचल में कथित इलाज मामले में जांच पर उठे सवाल, सूचना लीक होने और विभागीय मिलीभगत की चर्चाएं तेज

भौंरा । ग्राम बरजोरपुर स्थित महावीर मेडिकल स्टोर पर कथित एलोपैथिक इलाज के मामले में दूसरे दिन नया मोड़ सामने आया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बैतूल डॉ. मनोज हुरमाडे के निर्देश पर शाहपुर बीएमओ डॉ. शिवकुमार रघुवंशी के नेतृत्व में जांच टीम गठित कर मौके पर भेजी गई, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही मेडिकल दुकान बंद मिली। मेडिकल संचालक मौके से गायब बताया गया। इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले में विभागीय कार्यप्रणाली और संभावित मिलीभगत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार जांच टीम बरजोरपुर पहुंची तो महावीर मेडिकल स्टोर बंद मिला। शाहपुर बीएमओ डॉ. शिवकुमार रघुवंशी ने बताया कि टीम जांच करने पहुंची थी, लेकिन मेडिकल बंद मिला। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीणों द्वारा पंचनामा बनाकर दिया गया है, जिसमें उल्लेख किया गया कि मेडिकल में किसी प्रकार का इलाज नहीं किया जा रहा है।

हालांकि पूरे घटनाक्रम ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि जांच टीम के पहुंचने से पहले ही मेडिकल संचालक को कार्रवाई की सूचना मिल गई थी, जिसके चलते वह दुकान बंद कर मौके से चला गया। सूत्रों का दावा है कि जांच टीम से जुड़े किसी व्यक्ति द्वारा पहले ही जानकारी लीक किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मेडिकल संचालक द्वारा किसी प्रकार का इलाज नहीं किया जा रहा था, तो फिर जांच टीम के पहुंचने से पहले दुकान बंद कर गायब होने की जरूरत क्यों पड़ी? लोगों का आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम संदेह पैदा करता है कि कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण के कारण ही वर्षों से ऐसे कथित इलाज केंद्र संचालित होते रहे हैं।

पंचनामा पर भी उठे सवाल

ग्रामीणों द्वारा दिए गए पंचनामा को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मेडिकल संचालक से जुड़े कुछ लोगों द्वारा जानबूझकर ऐसा पंचनामा तैयार करवाया गया, जिससे मेडिकल स्टोर को बचाया जा सके और भविष्य में भी गतिविधियां पहले की तरह संचालित होती रहें।
लोगों का कहना है कि यदि जांच वास्तव में निष्पक्ष होती तो केवल बंद दुकान देखकर लौटने के बजाय मेडिकल स्टोर के दस्तावेज, दवा रिकॉर्ड, इंजेक्शन एवं ड्रिप उपयोग से संबंधित सामग्री और आसपास के लोगों के बयान भी दर्ज किए जाते।

जांच की गंभीरता पर सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस प्रकरण को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा है, उसमें जांच टीम बिना किसी ठोस कार्रवाई के वापस कैसे लौट गई। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य विभाग वास्तव में गंभीर होता तो मेडिकल संचालक को नोटिस जारी कर दस्तावेज तलब किए जाते और कथित इलाज संबंधी गतिविधियों की विस्तृत जांच की जाती।
ग्रामीणों का आरोप है कि आदिवासी क्षेत्रों में वर्षों से मेडिकल दुकानों की आड़ में इलाज का खेल चलता रहा, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी गंभीरता से कार्रवाई नहीं की। अब मामला सार्वजनिक होने के बाद भी केवल औपचारिक जांच कर खानापूर्ति किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

विभागीय भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग

क्षेत्र के लोगों ने पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि सूचना लीक होने और जांच से पहले मेडिकल बंद होने की बात सही है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर यह पता लगाया जाए कि मेडिकल संचालक को कार्रवाई की जानकारी पहले कैसे मिली और क्या स्थानीय स्तर पर किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध है। साथ ही पूरे शाहपुर विकासखंड में मेडिकल दुकानों की जांच अभियान चलाकर नियमों के विरुद्ध संचालित गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

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