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राज्यसभा चुनाव 2026: 24 खाली सीटों पर चुनाव का ऐलान

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने राज्यसभा चुनाव 2026 की तारीखों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। जून 2026 में देश के 11 राज्यों की 24 सीटें खाली हो रही हैं, जिन पर मतदान कराया जाएगा। आयोग के अनुसार, यह चुनाव 18 जून 2026 को पूरे देश में एक साथ होगा। इसी दिन वोटों की गिनती भी की जाएगी और पूरा चुनावी प्रोसेस 20 जून तक खत्म कर दिया जाएगा।

24 सीटों का गणित और किन राज्यों में चुनाव

इस बार कुल 24 राज्यसभा सीटें 11 राज्यों में खाली हो रही हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में 4-4 सीटें शामिल हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान में 3-3 सांसद रिटायर हो रहे हैं। झारखंड में 2 सीटें खाली होंगी, जबकि मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में 1-1 सीट पर चुनाव होगा। इसके अलावा तमिलनाडु और महाराष्ट्र में कुछ सीटों पर उपचुनाव भी कराए जाएंगे।

किन सांसदों की विदाई तय, राजनीतिक हलचल तेज

इस बार करीब 22 मौजूदा राज्यसभा सांसद 1 जून को अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। इनमें कई बड़े नाम शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, इनमें 11 सांसद बीजेपी से, 4 कांग्रेस से और बाकी 9 अन्य दलों से जुड़े हुए हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, राजनीतिक दलों में नए उम्मीदवारों को लेकर हलचल तेज हो गई है और जोड़-तोड़ की राजनीति भी शुरू हो चुकी है।

नामांकन और चुनाव की पूरी टाइमलाइन

चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया का शेड्यूल जारी कर दिया है। उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी। अगर किसी उम्मीदवार को नाम वापस लेना है तो वह 11 जून तक ऐसा कर सकता है। मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक कराया जाएगा, और उसी दिन काउंटिंग भी पूरी कर ली जाएगी।

चुनाव प्रक्रिया और रणनीति का खेल

राज्यसभा चुनाव में विधायकों के वोट के आधार पर सांसद चुने जाते हैं, इसलिए यह पूरी तरह राजनीतिक रणनीति का खेल बन जाता है। हर पार्टी अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश करती है। इस बार भी कई राज्यों में मुकाबला कड़ा रहने की उम्मीद है, खासकर उन जगहों पर जहां सीटों का गणित बराबरी का है।

राजनीतिक पार्टियों की तैयारी और आगे का असर

जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, बीजेपी, कांग्रेस और क्षेत्रीय दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में लगे हैं। उम्मीदवार चयन, गठबंधन और क्रॉस-वोटिंग रोकने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इन चुनावों का असर आने वाले राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता है, इसलिए सभी दल इसे बेहद गंभीरता से ले रहे हैं।

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