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राममंदिर भूमि की रजिस्ट्री शून्य घोषित करने प्रशासन ने डाला सिविल केस

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खबरवाणी

राममंदिर भूमि की रजिस्ट्री शून्य घोषित करने प्रशासन ने डाला सिविल केस

मुलताई। नगर के गांधी चौक मे स्थित राम मंदिर ट्रस्ट की करोड़ो रुपए की भूमि होने आप को सर्वराकार बताकर बेच दी गई थी। उक्त भूमि को बचाने के लिए जन आंदोलन मंच के अनिल सोनी सहित साथियो ने लंबी लड़ाई लड़ी थी। जिसमे अधिकारियो एवं संबंधितो पर अपराधिक प्रकरण भी दर्ज हुए थे। लेकिन भूमि की रजिस्ट्री शून्य नही हुई थी। जिसके लिए अनिल सोनी अभी तक लड़ाई लड़ रहे है। अंततः अनिल सोनी के संघर्ष के बाद प्रशासन द्वारा विक्रय पत्र शून्य घोषित करने प्रशासन की ओर से एसडीएम राजीव कहार की ओर से शासकीय अधिवक्ता राजेश साबले द्वारा सिविल प्रकरण प्रस्तुत किया है।जन आंदोलन मंच के अनिल सोनी ने प्रेस नोट जारी कर बताया राममंदिर भूमि मामला लंबे संघर्ष, जनहित और कानूनी प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है। यदि वास्तव में 13 वर्षों के प्रयासों के बाद 17 एकड़ भूमि संरक्षण की स्थिति में है, तो यह जनमंच की सक्रियता और स्थानीय जागरूकता का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा सकता है। यदि विक्रय हुई 17 एकड़ भूमि की रजिस्ट्री न्यायालय द्वारा शून्य घोषित होती है, तो उसी खसरे से पूर्व में हुई अन्य रजिस्ट्रियों पर भी प्रभाव पड़ सकता है,यह कानूनी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे मामलों में न्यायालय दस्तावेज, स्वामित्व, ट्रस्ट की वैधता, सर्वराकार की अधिकारिता तथा पूर्व रजिस्ट्रियों की वैधानिक स्थिति का परीक्षण करता है।यदि दस्तावेजों के अनुसार भूमि विक्रय करने वाले सर्वराकार के नाम से कोई वैध समिति या ट्रस्ट गठित नहीं था और किसी अन्य संस्था का हवाला देकर रजिस्ट्री की गई, तो यह मामला और गंभीर हो जाता है। ऐसी स्थिति में न्यायालय तथ्य, अभिलेख और पक्षकारों के साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देता है। करीब 200 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि और मुख्य सड़क से लगी लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति का मामला केवल आर्थिक नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सार्वजनिक संपत्ति और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा विषय है।यदि जनमंच संगठन, स्थानीय नागरिकों और वर्तमान विधायक के प्रयासों से न्यायिक समाधान की दिशा बन रही है, तो यह लोकतांत्रिक सहभागिता का सकारात्मक उदाहरण कहा जा सकता है।

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