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ब्रेकिंग न्यूज – अतिक्रमण हटाने के नाम पर क्रूरता, और आजीविका पर चली प्रशासन की तानाशाही
संवाददाता – शहर की सड़कों को व्यवस्थित करने का प्रशासनिक दावा उस समय विवादों के घेरे में आ गया, जब आमगांव नाके से राठी तिराहे तक की गई कार्रवाई में नियम कम और ‘तानाशाही’ ज्यादा नजर आई। अतिक्रमण हटाने निकले भारी भरकम अमले ने गरीबों की छोटी-छोटी गुमटियों और टप को हटाने की मोहलत देने के बजाय, उन्हें सामान सहित कुचलना शुरू कर दिया।
हिटलरशाही सा नजारा: आंखों के सामने कुचली गई रोजी-रोटी
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, प्रशासन ने पूर्व में सूचना तो दी थी, लेकिन जिस तरह से अचानक दल-बल और बुलडोजर के साथ कार्रवाई शुरू की गई, उसने कई दुकानदारों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। कई गरीबों की जीविका के साधन उनके आंखों के सामने मलबे में तब्दील हो गए। मौके पर मौजूद लोगों ने इस कार्रवाई की तुलना ‘हिटलरशाही’ से करते हुए कहा कि यह सुधार नहीं, बल्कि गरीबों पर किया गया प्रहार है।
मानवीयता को ताक पर रखा: सूने पड़े टप को भी नहीं बख्शा
प्रशासन की इस कार्रवाई में संवेदनहीनता के दो बड़े मामले सामने आए:
इलाज कराने गया था परिवार, पीछे से टूट गई दुकान: एक गरीब दुकानदार अपने परिवार के सदस्य का इलाज कराने जबलपुर गया था। उसकी अनुपस्थिति में प्रशासन ने उसके ३x३ के टप को हटाने के बजाय सीधे तोड़ दिया, जिससे उसमें रखा हजारों का सामान भी बर्बाद हो गया।
शादी की खुशियों के बीच बरपा कहर: राठी तिराहा स्थित छीपा परिवार के यहाँ बेटे की शादी होने के कारण दुकान बंद थी। प्रशासन ने बंद दुकान को बिना किसी सूचना के सामान समेत कुचल दिया।
प्रशासन की निष्पक्षता पर उठते गंभीर सवाल
इस पूरी कार्रवाई ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं:
दोहरे मापदंड: स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन रसूखदारों और बड़े व्यापारियों के अतिक्रमण पर ‘खानापूर्ति’ कर रहा है, जबकि गरीबों पर पूरा जोर दिखाया जा रहा है।
नियमों की अनदेखी: क्या किसी की अनुपस्थिति में उसकी संपत्ति को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के नष्ट करना जायज है?
अंधेर नगरी चौपट राजा: जनता के बीच चर्चा है कि प्रशासन का यह अभियान ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ वाली स्थिति पैदा कर रहा है, जहाँ न्याय और नीति का अभाव दिख रहा है।
निष्कर्ष: सड़कों को चौड़ा करना और अतिक्रमण हटाना शहर के विकास के लिए जरूरी है, लेकिन क्या विकास की यह कीमत गरीबों के आंसू और उनकी बर्बादी से चुकाई जानी चाहिए? अब देखना यह है कि प्रशासन अपनी इस छवि को सुधारने के लिए क्या निष्पक्ष कदम उठाता है।





