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बुरहानपुर में रेत घाटों पर अवैध उत्खनन बेखौफ जारी, मजदूरों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

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खबरवाणी

बुरहानपुर में रेत घाटों पर अवैध उत्खनन बेखौफ जारी, मजदूरों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

भोपाल। जिले में रेत घाटों पर अवैध उत्खनन का खेल लगातार बेधड़क जारी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कई स्थानों पर बिना किसी भय और कार्रवाई के अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है। प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं इस पूरे मामले में मजदूरों और ट्रैक्टर चालकों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। बिना सीमाकन किए घाटों से भी रेत का उत्खनन किया जा रहा है मजदूरों की जान जोखिम में रेत घाटों पर काम करने वाले ट्रैक्टर चालक और मजदूर कड़ी धूप में बिना किसी मूलभूत सुविधा के काम करने को मजबूर हैं। पीने के पानी, छाया और प्राथमिक उपचार जैसी जरूरी व्यवस्थाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। मजदूरों का कहना है कि कई बार घंटों तक पानी नहीं मिल पाता, जिससे स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा बना रहता है।यदि किसी चालक या मजदूर की तबीयत खराब हो जाए या कोई दुर्घटना हो जाए, तो उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। ठेकेदारों द्वारा सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है, जिससे मजदूरों की जान खतरे में पड़ रही है।
सूचना बोर्ड का अभाव, नियमों की जानकारी नहीं जिले के अधिकांश रेत घाटों पर सूचना बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं। न तो बंद और चालू घाटों की स्पष्ट जानकारी दी गई है और न ही खनन से जुड़े नियमों का उल्लेख किया गया है। नियमों के अनुसार घाट पर यह जानकारी प्रदर्शित करना अनिवार्य होता है कि:
घाट चालू है या बंद

निर्धारित गहराई (धड़ा) कितनी है
खनन का समय और शर्तें क्या हैं

लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन होता नजर नहीं आ रहा है। इससे आम नागरिकों को भी सही जानकारी नहीं मिल पा रही है।
ठेकेदारों पर मनमानी के आरोप स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत ठेकेदार नियमों की अनदेखी कर मनमानी तरीके से खनन करवा रहे हैं। तय सीमा से अधिक गहराई तक रेत निकालने और प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी उत्खनन की शिकायतें सामने आ रही हैं।प्रशासन से कार्रवाई की मांग ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि अवैध उत्खनन पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी घाटों पर स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाए जाएं, मजदूरों के लिए पानी, छाया और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, तथा बंद घाटों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक सख्त कदम उठाता है या फिर अवैध उत्खनन का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

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