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आमला । एसडीएम के औचक निरीक्षण में खुली व्यवस्थाओं की पोल, हसलपुर स्कूल में 17 में से मिले सिर्फ 4 बच्चे

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खबरवाणी

आमला । एसडीएम के औचक निरीक्षण में खुली व्यवस्थाओं की पोल, हसलपुर स्कूल में 17 में से मिले सिर्फ 4 बच्चे

महिला बाल विकास कार्यालय में कार्यगति धीमी मिलने पर भड़के एसडीएम, 15 दिन में मांगा पालन प्रतिवेदन

आमला | एसडीएम शैलेन्द्र बड़ोनिया ने शुक्रवार को सरकारी महकमों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान महिला एवं बाल विकास परियोजना कार्यालय से लेकर ग्रामीण स्कूलों तक कई खामियां उजागर हुईं। निरीक्षण में कहीं उपस्थिति रजिस्टर अधूरा मिला, तो कहीं बच्चों की बेहद कम उपस्थिति पर एसडीएम ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को फटकार लगाते हुए 15 दिन के भीतर सुधार का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

कुपोषित बच्चों की ट्रैकिंग में तेजी लाने के निर्देश

परियोजना कार्यालय के निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट खंगाली। कार्यालय में साफ-सफाई का अभाव और फाइलों की धीमी रफ्तार देख उन्होंने अधिकारियों को जमकर टोका। क्षेत्र में चिन्हित 179 कुपोषित बच्चों की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि गंभीर श्रेणी के बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) भेजा जाए। लाड़ली लक्ष्मी और मातृ वंदना योजना के लंबित प्रकरणों को समय सीमा में निपटाने के साथ ही सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की हिदायत दी गई।

आंगनवाड़ी में खाने की गुणवत्ता और सफाई पर जोर

कार्यालय के बाद एसडीएम ने आंगनवाड़ी केंद्रों का रुख किया। वहां बच्चों को परोसे जा रहे नाश्ते और भोजन की गुणवत्ता जांची गई। उन्होंने सहायिकाओं को निर्देशित किया कि बच्चों का नियमित वजन मापन और स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित करें। मेन्यू के अनुसार ही भोजन का वितरण होना चाहिए, इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्कूल की स्थिति बदहाल: 16-17 अप्रैल की हाजिरी ही नहीं भरी

निरीक्षण का सबसे चौंकाने वाला पहलू ग्राम हसलपुर की प्राथमिक शाला में सामने आया। यहां रिकॉर्ड्स में भारी लापरवाही मिली; उपस्थिति रजिस्टर में 15 अप्रैल के बाद प्रविष्टियां ही दर्ज नहीं थीं। स्कूल की दर्ज संख्या 17 है, लेकिन मौके पर केवल 4 छात्र ही मौजूद मिले। इस पर एसडीएम ने नाराजगी जताते हुए शिक्षकों को निर्देशित किया कि वे पालकों से संपर्क कर छात्रों की उपस्थिति बढ़ाएं। पाठ्य पुस्तक वितरण रजिस्टर में भी कई जगह हस्ताक्षर नहीं थे, जिसे तत्काल दुरुस्त करने के आदेश दिए गए।

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