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विश्वकर्मा समाज का बसंतोत्सव धूमधाम से सम्पन्न, कवि सम्मेलन ने बांधा समां
खबरवाणी न्यूज़ रफीक
सारनी। श्री गौड़ विश्वकर्मा समाज संगठन द्वारा आयोजित बसंतोत्सव समारोह सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री अचल कुमार मिश्रा (उपक्षेत्रीय प्रबंधक वेकोली) उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में श्री शिवपाल सिंह राजपूत (पूर्व डिप्टी डायरेक्टर एन.वाय.के. बैतूल), महेंद्र सिंह ठाकुर, ओमकार शुक्ला, राजकुमार मालवीय, मोहनलाल मालवीय, अशोक बंटी मालवीय, दीपक मालवीय, छाया विश्वकर्मा, ज्योति मालवीय, वंदना मालवीय, उषा मालवीय, पूनम शुक्ला, गौरी शर्मा, नरेन्द्र विश्वकर्मा, अजय प्रजापति, जयकरण भारती, गणेश चौरे, बसंत नर्वरे, निखिल मालवीय सहित बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य नागरिक एवं महिलाएं उपस्थित रहीं।
कवि सम्मेलन में हास्य, वीर, श्रृंगार और राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत रचनाओं का पाठ किया गया। प्रमुख कवियों की पंक्तियां इस प्रकार रहीं—
जगदीश तपिश
“नीची नज़र से आदमी को देखने वालों,
आदमी ही आदमी के काम यहां आता है।
फिर चाहे वो गरीब हो अमीर हो या बादशाह,
आदमी अपना जनाजा खुद नहीं उठाता है।”
मुस्कान चौकसे
“जब-जब संसार मर्यादा की राह भूल जाती है,
तब-तब इतिहास के पन्नों से रामायण पुकार लगाती है।
जिस दिन हर हृदय में राम जाग जाएगा,
उसी दिन यह कलयुग भी हार जाएगा।”
सरिता सिंघई ‘कोहिनूर’
“क्यूँ कत्ल कर हमारा गुनहगार दूर है,
चाहत का नूर इश्क का सरकार दूर है।
बस जी रहे तमन्ना लिये वो मिले जरूर,
है दिल का रिश्ता जिससे वो दिलदार दूर है।”
महेंद्र चौकसे
“दिल करता है प्रेयसी के जुड़ें में ढेर सारे फूल सजाऊं,
मगर अफसोस फूल सजाने के लिए बाल कहां से लाऊं।”
गीतेश्वर बाबू ‘घायल’
“नेह के अनुबंध गढ़कर देखना,
चाहतों की राह चल कर देखना।
तुम समझ जाओगे मेरे दर्द को,
तुम मेरे कुछ छंद पढ़कर देखना।”
अशोक विद्रोही
“कहा धरती ने बादल से तुम्हें क्या मेरी जरूरत है,
हमारी उष्ण तपन देखो तुम्हें क्या थोड़ी फुर्सत है।
तो बादल ने कहा सुन ए धरा तू मन लगाकर सुन,
तुझे मेरी जरूरत है मुझे तेरी जरूरत है।”
सुनीता पटेल (भोपाल)
“सुर, नानका, मीरा, तुलसी और कबीरा की वाणी हूँ,
सीता, मरियम, दुर्गा-काली और झांसी की रानी हूँ।
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे की घंटी, अज़ान, गुरुबानी हूँ,
भारत माता की जाई, मैं लड़की हिन्दुस्तानी हूँ।”
विकास बैरागी
“रील बन रही चौबीस घंटे, नहीं कर रहीं काम,
चलातीं दिनभर इंस्टाग्राम।”
रमेश शर्मा ‘धुँआधार’
“गम को खुशी बना दो तो कोई बात बने,
तम को उजाला दिखा दो तो कोई बात बने।
बातें तो बहुत करते हो स्वर्ग की तुम,
इस जमीं को जन्नत बना दो तो कोई बात बने।”
समापन समारोह में विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे (आमला) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम भारती महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती भारती अग्रवाल ने की। इस अवसर पर युवराज मालवीय (श्री गौड़ बैतूल), अरुण पिप्रोदे (कामठी), श्रीमती पुष्पा विश्वकर्मा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, जगतगुरु भगवान विश्वकर्मा वाहिनी), श्रीमती संगीता विश्वकर्मा (प्रदेश महिला प्रभारी), अजय मालवीय (राष्ट्रीय महामंत्री), रविशंकर विश्वकर्मा (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), रमेश मालवीय, रंगलाल मालवीय, नाथूराम विश्वकर्मा सहित जिले एवं बाहर से आए अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान महिला दिवस पर आयोजित भजन प्रतियोगिता के विजेता महिला मंडलों को सम्मानित किया गया। साथ ही नृत्य प्रतियोगिता एवं बोर्ड परीक्षाओं में 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र वितरित किए गए।
अंत में संस्थापक अशोक विद्रोही, अध्यक्ष विनोद विश्वकर्मा, उपाध्यक्ष सुनील मालवीय एवं कोषाध्यक्ष द्वारा सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया गया। पूरा आयोजन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक समृद्धि और प्रतिभाओं के सम्मान का प्रतीक बना।






