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ग्लोबल पब्लिक स्कूल सुरगांव की मान्यता को लेकर ग्रामीणों ने एसडीएम और कलेक्टर से की शिकायत
बैतूल जिले के ग्राम सुरगांव में संचालित किए जा रहे ग्लोबल पब्लिक स्कूल की मान्यता को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए एसडीएम कार्यालय तथा जनसुनवाई में जिला कलेक्टर से शिकायत की है। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय की मान्यता प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण नियमों और मापदंडों की अनदेखी की जा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार किसी भी विद्यालय की पेट्रोल पंप से न्यूनतम दूरी 50 मीटर होना अनिवार्य है, जबकि ग्लोबल पब्लिक स्कूल की दूरी पेट्रोल पंप से मात्र लगभग 60 फीट बताई जा रही है, जो निर्धारित मानकों का स्पष्ट उल्लंघन है।
इसके अलावा जिस भवन में ग्लोबल पब्लिक स्कूल संचालित किया जा रहा है वह अभी निर्माणाधीन है। भवन की छत का लेटर हाल ही में डाला गया है और सेंटिंग-शटरिंग तक नहीं निकाली गई है। साथ ही उक्त भवन का शैक्षणिक प्रयोजन के लिए डायवर्सन भी नहीं किया गया है, जो कि नियमों के विरुद्ध है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि ग्राम पंचायत सुरगांव द्वारा ग्राम सभा में शासकीय विद्यालय के अत्यंत समीप निजी विद्यालय खोलने की कोई अनुमति ग्लोबल पब्लिक स्कूल को नहीं दी गई है। इसके बावजूद विद्यालय संचालित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अब तक किसी प्रकार की जांच समिति का गठन नहीं किया गया है और अधिकारियों द्वारा निर्माणाधीन भवन की सेंटिंग-शटरिंग खुलने का इंतजार किया जा रहा है, ताकि बाद में औपचारिकता पूरी कर विद्यालय की मान्यता दी जा सके।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विद्यालय के संचालक भारत झारिया एवं दीपक झारिया (जो स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ शासकीय कर्मचारी बताए जा रहे हैं) शासकीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को यह कहकर प्रभावित कर रहे हैं कि मान्यता मिलने पर बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दी जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे प्रलोभन से शासकीय विद्यालय की छात्र संख्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और भविष्य में शासकीय विद्यालय बंद होने की स्थिति बन सकती है।
इसके अतिरिक्त ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संचालक द्वारा समिति के सदस्य बनाने के नाम पर भोले-भाले ग्रामीणों से कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं और बाद में उनका उपयोग अपने पक्ष में समर्थन दर्शाने के लिए प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे अधिकारियों और आम जनता को भ्रमित किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय विद्यालय के अत्यंत समीप निजी विद्यालय खोले जाने से बच्चों के मन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और उनमें हीन भावना उत्पन्न हो सकती है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि बीआरसी स्तर पर अनिवार्य मापदंडों की समुचित जांच किए बिना ही ग्लोबल पब्लिक स्कूल की मान्यता हेतु प्रस्ताव डीपीसी कार्यालय को भेज दिया गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नियमों के अनुरूप कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।





