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अभी तो यह अंगड़ाई है आगे और लढाई है नारों के साथ गुंज उठा परिसर

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खबरवाणी

अभी तो यह अंगड़ाई है आगे और लढाई है नारों के साथ गुंज उठा परिसर

मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रांतीय आव्हान पर जिला इकाई द्वारा कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौपा ज्ञापन

बुरहानपुर– सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आड में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षकों को टीईटी परिक्षा की आग में झोकने के फैसले के खिलाफ मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रांतीय आव्हान पर 13 मार्च को सायं 5 बजे जिला कलेक्टर प्रतिनिधि बुरहानपुर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा| जिले के शिक्षक कलेक्टर परिसर में एकत्रित हुए| शिक्षकों ने नारे लगाते हुए कहा कि “अभी तो यह अंगड़ाई है आगे और लढाई है परिसर से गुंज उठा”| टीईटी परिक्षा का निर्णय वापस लो वापस लो|

ज्ञापन का वाचन जिला सचिव कैलाश राठौड़ ने किया

प्रति,
1-मुख्यमंत्री महोदय
मध्य प्रदेश शासन
भोपाल
2-मुख्य सचिव महोदय
मध्य प्रदेश शासन
द्वारा:- कलेक्टर जिला बुरहानपुर

विषय:-राज्य सरकार के विषयगत अधिकारों का अतिक्रमण न करने के अनुरोध एवं TET परीक्षा के विरुद्ध रिव्यू पिटीशन लगाने बाबत।
संदर्भ:-लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल मप्र का पत्र क्रमांक/यूसीआर/सी/85/प्रा.मा.शि./2025-26/356 भोपाल दिनांक 3 मार्च 2026.

महोदय
उपरोक्त विषय अंतर्गत एवं संदर्भित पत्र के क्रम में अनुरोध है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य रूप से शिक्षा का अधिकार अधिनियम(RTE Act)2009 की धारा 23(1) के तहत अनिवार्य की गई है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 क (निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार) को लागू करने के लिए शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता निर्धारित करती है। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) ने इस कानून के तहत कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए TET को अनिवार्य बनाया है जिसमें संवैधानिक आधार,अनुच्छेद 21-A, जो 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है तथा इसमें RTE Act 2009 की धारा 23 ,NCTE अधिसूचना 31 मार्च 2010, 23 अगस्त 2010 एवं अधिसूचना 29 जुलाई 2011 के अनुसार ही TET को प्राथमिक स्तर (कक्षा 1-5) और उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6-8) के लिए योग्य होने के लिए अनिवार्य किया गया था । 2009 से पूर्व भी शिक्षकों की भर्ती हो चुकी थी तथा RTE ACT 2009 में लागू हुआ है, तब ऐसे में 2009 तक नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम किस प्रकार लागू होता है ? अग्र निवेदन निम्न अनुसार प्रस्तुत है :-
1. यह कि,उक्त संदर्भित पत्र की भाषा व लेख से यह स्पष्ट होता है कि इस विषय(TET परीक्षा पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय दिनांक 01 सित.2025 ) के संबंध में संदर्भित पत्र जारी करने से पहले राज्य सरकार, मंत्रिमंडल एवं राज्य सरकार सचिवालय स्तर पर कोई भी संपर्क ,सलाह एवं अभिमत तथा लिखित अनुमोदन ; संभवत: प्राप्त नहीं किया गया है,जो कि शासन नीति अनुसार लिया जाना अति आवश्यक था
2. यह कि, उक्त संदर्भित पत्र में राज्य स्तर, मंत्रिमंडल स्तर या स्कूल शिक्षा सचिवालय स्तर से अनुमोदन या आदेश संचालनालय द्वारा प्राप्त करना दृष्टिगत व उल्लिखित नहीं हो रहा है ।
3. यह कि, माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा TET परीक्षा के संबंध में सिविल अपील क्रमांक 1385/2025 में जारी निर्णय दिनांक 01 सित 2025 में याचक एक अशासकीय शिक्षण संस्था है तथा इसमें उत्तरदाता राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद, नई दिल्ली है तथा संदर्भित पत्र में यह भी स्पष्ट नहीं है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय के क्रम में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद नई दिल्ली द्वारा किसे एवं क्या आदेश जारी किया गया है महोदय जी,क्या राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद नई दिल्ली द्वारा सभी राज्यों के साथ-साथ मध्य प्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग के लोक शिक्षण संचालनालय, गौतम नगर भोपाल को TET परीक्षा
( प्रदेश में पिछले 25 वर्षों से कार्य कर रहे शिक्षकों की) जुलाई एवं अगस्त के महीने में करने के लिए आदेश
या निर्देश दिए गए हैं ।
4. यह कि, महोदय मध्य प्रदेश के नवीन शिक्षक संवर्ग जिसमें समस्त शिक्षक, अध्यापक, माध्यमिक शिक्षक तथा प्राथमिक शिक्षक अपनी प्रथम नियुक्ति शिक्षाकर्मी एवं संविदा शिक्षक से होते हुए आए हैं जो कि शासन में निरंतर रूप से सेवारत हैं । शिक्षाकर्मी पद पर हुई नियुक्ति माननीय सर्वोच्च न्यायालय के प्रकरण क्रमांक सिविल अपील 4032/1995(मध्य प्रदेश शासन अन्य विरुद्ध दिनेश कुमार अन्य) में निर्णय दिनांक 21 अक्टूबर 1997 से हुई थी एवं इस प्रकरण में मध्य प्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा नवीन संशोधित शिक्षाकर्मी भर्ती अधिनियम 1997 (25 सितंबर 1997) जारी कर निर्धारित सेवा-शर्तों के अधीन विधिवत रूप से भर्तियां की गई थी ।
5. यह कि, उपर्युक्त भर्ती अधिनियम 1997 एवं शिक्षाकर्मी भर्ती अधिनियम 1998 तथा अध्यापक भर्ती अधिनियम 2008 और 01 जुलाई 2018 से लागू मप्र स्कूल शिक्षा ( शैक्षणिक संवर्ग ) सेवा शर्ते एवं भर्ती नियम दिनांक 28 जुलाई 2018 तथा मप्र जनजातीय एवं अनुसूचित जाति शिक्षण संवर्ग सेवा शर्त्तें एवं भर्ती नियम में वर्णित सभी सेवा शर्तों में इस तरह की (TET परीक्षा को उत्तीर्ण किया जाना) कोई सेवा-शर्त राज्य शासन स्कूल शिक्षा / जनजाति एवं अनुसूचित जाति विभाग या मध्य प्रदेश शासन के किसी अन्य विभाग द्वारा उल्लेखित एवं वर्णित नहीं की गई थी।
6. यह कि, माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील 2634/2013 के निर्णय में आदेशित किया है कि किसी भी कर्मचारी की सेवा-शर्त्ते एवं भर्ती नियमों को उसकी नियुक्ति के बाद परिवर्तित नहीं किया जा सकता है, ऐसी स्थिति में, उक्त संदर्भित, जो पत्र जारी किया गया है वह शासन, संचालनालय एवं कार्यालय की आधिकारिक कार्य शैली तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अन्य निर्णयों विपरीत होना स्पष्ट दृष्टिगत होता है ।
आपसे सादर अनुरोध है कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के उक्त संदर्भित पत्र पर रोक लगाने की कार्यवाही करते हुये देश के अन्य प्रदेश शासन की भाँति मप्र शासन द्वारा भी सिविल अपील1385/2025 के निर्णय के विरुद्ध माननीय उच्चतम न्यायालय में रिव्यू पिटीशन लगाने का सादर आग्रह है
यहा यह उल्लेख करना चाहूँगा की पूर्व मे म. प्र. शासन द्वारा जिस प्रकार आरक्षण के संबंध मे मा .उच्च न्यायालय जबलपुर के निर्णय से आहत हो माननीय उच्चतम न्यायालय मे याचिका दायर की गई थी वही माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा TET परीक्षा के संबंध में सिविल अपील क्रमांक 1385/2025 में जारी निर्णय दिनांक 01 सित 2025 के पश्चात उत्तर प्रदेश राज्य के शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में पुष्टि की है कि सरकार ने इस मामले में पुनरीक्षण याचिका दायर कर दी है एवं जम्मू-कश्मीर सरकार इस निर्णय के स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन और आगामी भर्तियों व पदोन्नति पर इसके प्रभाव की समीक्षा कर रही है एवं अन्य राज्य भी पुनरीक्षण याचिका दायर करने का विचार कर रहे है |
लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के उक्त संदर्भित पत्र जो जल्दबाजी मे जारी किया गया है से प्रदेश के लगभग 3,00,000 (तीन लाख) शिक्षकों में भय एवं रोष व्याप्त हो रहा है ।
म प्र शासन द्वारा संदर्भित पत्र पर रोक नहीं लगाने एवं माननीय उच्चतम न्यायालय में रिव्यू पिटीशन नहीं लगाने की दशा में शिक्षक संवर्ग के हित संरक्षण हेतु म प्र राज्य कर्मचारी संघ को माननीय उच्चतम न्यायालय मे पुनरीक्षण याचिका दायर करने हेतु बाध्य होना पड़ेगा ।
महोदय जी,कृपया उपरोक्त बिन्दुओं पर विचार कर माननीय उच्चतम न्यायालय मे पुनरीक्षण याचिका दायर करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने की , आपसे अपेक्षा है।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय चौधरी संभागीय सचिव संजय सिंह गहलोत जिला अध्यक्ष सुनीता महाजन, संगठन मंत्री दिलीप इंगले,नेपानगर, खकनार,धुलकोट क्षेत्र के पदाधिकारी, महीला प्रतिनिधि सहित अन्य संगठन के पदाधिकारी भी उपस्थित रहें|

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