आजकल बहुत-सी नई माओं की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि उनका छोटा बच्चा रात में सोता नहीं और बार-बार रोने लगता है। कई बार बच्चा दिन भर सोता रहता है और रात होते ही जाग जाता है। इससे मां की नींद भी खराब हो जाती है और थकान, चिड़चिड़ापन जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों को शुरू से ही सही रूटीन की आदत डालना जरूरी होता है, वरना उनका दिन-रात का समय उल्टा हो जाता है। अगर आपका बेबी भी रात में रोता है, तो इन देसी और आसान टिप्स को अपनाकर आप काफी हद तक इस परेशानी से बच सकती हैं।
बच्चे के रात में रोने की सबसे बड़ी वजह – भूख
छोटे बच्चों का पेट बहुत जल्दी खाली हो जाता है, इसलिए उन्हें बार-बार भूख लगती है। कई बार मां को लगता है कि बच्चा बिना वजह रो रहा है, लेकिन असल में वह भूखा होता है। अगर आपका बेबी रात में रोने लगे तो सबसे पहले उसे दूध पिलाएं। मां की गोद में लेकर धीरे-धीरे थपकी देने से भी बच्चा जल्दी शांत हो जाता है। कई बार सिर्फ मां की गोद और दूध ही बच्चे को आराम देने के लिए काफी होता है।
गैस या पेट दर्द भी बन सकता है कारण
कई बच्चों को दूध पीने के बाद गैस बन जाती है, जिससे उन्हें पेट में दर्द होता है और वे रोने लगते हैं। इसलिए हर बार दूध पिलाने के बाद बच्चे को अपने कंधे पर सीधा लगाकर हल्के-हल्के थपथपाएं ताकि उसे डकार आ जाए। गांव-घर की भाषा में कहें तो “डकार निकलना” बहुत जरूरी है, वरना बच्चा रात में बेचैन हो सकता है।
गीला डायपर भी करता है बच्चे को परेशान
नन्हे-मुन्ने बच्चों की त्वचा बहुत नाजुक होती है। अगर डायपर ज्यादा देर तक गीला रहे तो बच्चे को जलन और असहजता महसूस हो सकती है। ऐसे में बच्चा रात में रोने लगता है। इसलिए जब भी बच्चा रोए, एक बार डायपर जरूर चेक कर लें। कोशिश करें कि हर 3-4 घंटे में डायपर बदल दिया जाए।
ज्यादा गर्मी या ठंड से भी बच्चा रो सकता है
कई बार मांएं बच्चे को ज्यादा कपड़ों में लपेट देती हैं, जिससे उसे गर्मी लगने लगती है। वहीं अगर बच्चा खुला रह जाए तो उसे ठंड भी लग सकती है। इसलिए मौसम के हिसाब से बच्चे को कपड़े पहनाएं। बहुत ज्यादा कंबल या कपड़े भी न डालें और पूरी तरह खुला भी न छोड़ें।
बच्चे के लिए सही स्लीप रूटीन बनाना जरूरी
डॉक्टरों के अनुसार बच्चे को शुरू से ही सोने का एक तय समय देना चाहिए। कोशिश करें कि रोज रात करीब 8 बजे बच्चे को सुलाने की आदत डालें। उस समय कमरे में शांति रखें, तेज रोशनी या आवाज से बचें। धीरे-धीरे बच्चा समझने लगेगा कि यह सोने का समय है। इसके अलावा डायपर बदलते समय बेबी क्रीम लगाना भी जरूरी है, ताकि रैशेज न हों और बच्चा आराम से पूरी रात सो सके।
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