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आमला: बैल बाजार में अतिक्रमण का बोलबाला, फुटपाथ पर बैठने को मजबूर किसान और छोटे व्यापारी
गंदगी और अवैध कब्जों से सिमटा बाजार; रेल पटरी के पास झोपड़ियाँ दे रही हैं बड़े हादसे को न्योता
आमला | नगर के बैल बाजार क्षेत्र में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। अतिक्रमण और गंदगी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब किसान और छोटे व्यापारियों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। बोरदेही, नरेरा, जमदेही और रतेड़ा जैसे आदिवासी अंचलों से अपनी उपज बेचने आने वाले किसानों को बाजार में बैठने तक की जगह नहीं मिल पा रही है।
अतिक्रमण की चपेट में ‘मीना बाजार’ का राजस्व
कभी इस स्थान पर नगर पालिका ‘मीना बाजार’ लगाकर मोटा राजस्व वसूलती थी, लेकिन अब यह जगह पूरी तरह अतिक्रमण की चपेट में है। वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय ने बताया कि बाजार क्षेत्र में चारों ओर अवैध कब्जे हो चुके हैं। पार्किंग की कोई व्यवस्था न होने से शनिवार बाजार के दौरान ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है। आलम यह है कि होटल संचालक और स्थानीय निवासी भी अपना कचरा यहीं फेंक रहे हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
प्रमुख समस्याएँ जो बनीं सिरदर्द:
रेलवे ट्रैक के पास खतरा: रेल पटरी से सटकर बनी झोपड़ियाँ कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। रेल प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अधूरी पहल: लगभग 2 साल पहले नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षद राकेश शर्मा ने बाजार सुधार की पहल की थी, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक कार्य नहीं हुआ।
सड़क पर दुकानदारी: मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण के कारण छोटे दुकानदार सड़क पर बैठने को मजबूर हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपील
अधिवक्ता उपाध्याय ने नगर पालिका परिषद और आदिवासी अंचल के जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि गरीब किसानों के हित में इस क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो छोटे व्यापारियों का व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा।
“बाहर से आने वाले व्यापारियों के लिए पर्याप्त स्थान और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर पालिका की जिम्मेदारी है। अतिक्रमण और गंदगी ने बाजार का स्वरूप बिगाड़ दिया है।”
— राजेंद्र उपाध्याय, वरिष्ठ अधिवक्ता






