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धूरेड़ी पर्व . धुलेंडी पर फाग गीतों की गूंज: चंद्र ग्रहण के साये के बाद आपसी भाईचारे के साथ मना रंगों का उत्सव
आमला। जल संरक्षण का संदेश: आमला नगरी और ग्रामीण अंचलों में पानी बचाने के संकल्प के साथ गुलाल से खेली गई होली
आमला नगरी एवं ग्रामीण अंचलों में होली के पावन पर्व के अवसर पर इस वर्ष चंद्र ग्रहण के प्रभाव के चलते दो दिवस में होलिका दहन के बाद क्षेत्र में बुधवार को हर्षोल्लास के साथ और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया रंगों का पावन पर्व धूरेड़ी क्षेत्र की नगरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में गली मोहल्ले में पर्व पर दिखा रंगों से अधिक गुलालो का उपयोग कर मनाया गया धूरेड़ी जल संरक्षण एवं पानी बचाओ जन जागरूकता हेतु क्षेत्र में दिखी नई मुहिम
रंगों की पावन पर्व एवं परंपराओं की मध्य जल संरक्षण जागरूकता
रंगों की पावन पर्व धुरेंडी और क्षेत्र में ज्यादातर लोगों द्वारा रंगों के स्थान पर सूखे रंगों से किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण एवं पानी बचाव हेतु जन जागरूकता अभियान के लिए आम लोगों को जागरूक करने की देखी गई मुहिम नगरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में गलियों में लोगों ने पानी के स्थान पर सूखे रंगों और गुलालो का जमकर किया उपयोग युवाओं की टोली में एक दूसरे को गुलाल लगाकर एवं बुजुर्गों से आशीर्वाद लेकर मनाया गया पावन पर्व
क्षेत्र में चौक चौराहा पर सुबह से शाम तक नजर आया युवाओं का उत्साह
रंगों के पावन पर्व धूरेड़ी पर नगरीय क्षेत्र के मुख्य रूप जनपद चौक ,बस स्टैंड, इतवारी चौक,सोमवारी चौक, गोविंद कॉलोनी, उप नगर बोड़खी, टंडन कैम्प गेट, भीम नगर क्षेत्र में युवाओं में देखा जमकर उत्साह ढोल नगाड़े के एवं हर्ष उल्लास और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया रंगो का पावन पर्व क्षेत्र में प्रशासन की मुस्तैदी के बीच शांतिपूर्ण तरीके से मनाए गए इस पर्व ने क्षेत्र में सद्भावना की नई मिसाल पेश की।
ग्रामीण अंचल में फाल्गुनी गीतों के साथ मनाया गया पावन पर्व
नांदपुर, देवठान, ससुंद्रा ससाबड़, परसोडा,रमली, खानापूर हसलपुर सहित आसपास के अन्य ग्रामीण अंचल में होलिका दहन की अगले दिन रंगो का पावन धूरेड़ी रंग गुलालो के साथ पौराणिक परंपराओं के अनुसार फाग गीतों के गायन के साथ ग्रामीण क्षेत्र इस वर्ष जिन भी परिवारों के घरों में कोई सदस्य का स्वर्गवास होने के चलते परिवार के सदस्य के जाने की क्षति के चलते दुख के माहौल उन परिवारों घरों तक पहुंच कर रंग गुलाल लगाकर आपसी भाईचारे के साथ घरों में पहुंचकर फाग गीत गायन कर पुरानी परंपराओं के अनुसार मनाया गया का उत्सव





