भाजपा के बागियों से चुनाव होगा प्रभावित, 18 वार्डों में दिख रही बगावत

सारनी(हेमंत सिंह रघुवंशी) – Sarni Nikaye Chunav – देश में एक अलग पहचान बनाने वाली सारनी नगरी जो सतपुड़ा पॉवर प्लांट के कारण खास मानी जाती थी। धीरे-धीरे विद्युत उत्पादन इकाईयां बंद होती गई और अब यह नगरी उजडऩे की कगार पर है। यही कारण है कि पिछले लंबे समय से उजड़ती सारनी को लेकर कई आंदोलन और धरने प्रदर्शन भी हो चुके हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि यहां पर नई यूनिट स्थापित की जाए जिससे बेरोजगारी का मुद्दा खत्म हो जाए। मांगों पर कोई असर होता नहीं दिखने के कारण वर्तमान में चल रहे नगर पालिका चुनाव में यह मुद्दा ज्वलंत बन गया है। इस मुद्दे के चलते सत्तारूढ़ दल को नुकसान भी हो सकता है। इसके अलावा भाजपा में इस बार बागियों की संख्या ज्यादा दिख रही है। 36 वार्डों में 18 वार्ड ऐसे हैं जहां भाजपा से बगावत कर प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। इसका सीधा असर भाजपा प्रत्याशी पर भी पड़ सकता है।
लगातार कम हो रहे मतदाता
36 वार्डों में टोटल मतदाताओं की संख्या 69 हजार 522 है। पिछले कई सालों में यहां मतदाताओं की संख्या लगातार कम हो रही है। इसका कारण है कि सतपुड़ा पॉवर प्लांट और डब्ल्यूसीएल से सेवा निवृत्त हुए अधिकारी-कर्मचारी बाहर चले गए हैं। और उनकी जगह पर कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है। जिसके कारण यहां पर जनसंख्या कम होती जा रही है।
बागियों की संख्या है ज्यादा
सारनी नगर पालिका के 36 वार्डों में 201 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा है। इसके साथ ही भाजपा के 36-कांग्रेस के 36 और आम आदमी पार्टी के 31 प्रत्याशी मैदान में है। इसके अलावा 98 प्रत्याशी ऐसे हैं जो किसी दल से ताल्लुक नहीं रखते हैं। या फिर भाजपा और कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के कारण बगावत कर मैदान में उतरे हैं। 36 में से 18 वार्ड ऐसे हैं जहां भाजपा के बागी प्रत्याशियों की संख्या ज्यादा है। और यही बागी चुनाव का समीकरण बिगाड़ सकते हैं। बताया जाता है कि भाजपा में 300 से ज्यादा आवेदन पार्षद प्रत्याशी की टिकट मांगने के लिए आए थे। इनमें से 36 को तो टिकट मिल गई, कुछ ने बगावत कर दी। लेकिन जो चुनाव नहीं लड़ रहे उनमें से कुछ भाजपा में भीतरघात भी कर सकते हैं। हालांकि कांग्रेस में भी कुछ बागी मैदान में है।
9 यूनिट की जगह बची 2 यूनिट
प्रदेश की तीसरे नंबर की मानी जाने वाली सारनी एक समय सतपुड़ा पॉवर प्लांट की 9 यूनिट के चलते गुलजार थी। और यहां पर लगभग 4 हजार अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत थे। जिसमें 1350 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होता था। धीरे-धीरे यूनिट बंद होती गई अब केवल 2 यूनिट चालू है जिसमें 500 मेगावॉट बिजली का उत्पादन हो रहा है। जानकार बताते हैं कि अधिकारी-कर्मचारियों की संख्या में भी 1 हजारक के अंदर ही सिमटकर रह गई है। यही हाल डब्ल्यूसीएल का है। जहां पहले 8 खदानें संचालित थी अब केवल 4 खदान ही बची है। जानकार बताते हैं कि पहले लगभग साढ़े 8 हजार अधिकारी-कर्मचारी यहां पदस्थ थे अब उनकी संख्या लगभग 3 हजार हो गई है।
यही हाल रहा तो हो जाएगा वीरान
कभी प्रदेश को रोशन करने का तमगा हासिल करने वाला सतपुड़ा थर्मल पॉवर प्लांट आज अंतिम सांसें गिनता हुआ दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही काला सोना कहे जाने वाले कोयले की खदानें भी निरंतर बंद होने से उत्पादन बेहद घट गया है। कुल मिलाकर देखा जाए तो एमपीईबी और वेकोलि की वजह से समूचे प्रदेश में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाला सारनी को उजडऩे से बचाने के लिए नई खदानें और नई यूनिटें नहीं लगाई गई तो वह दिन दूर नहीं है जब कभी व्यवसायिक, रोजगार के रूप में हरा-भरा कहा जाने वाला यह क्षेत्र वीरान हो जाएगा।





