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ट्रंप प्रशासन 2.0 का पहला साल: फैसलों से हिली दुनिया

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20 जनवरी 2025 को डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। ट्रंप प्रशासन 2.0 का पहला साल इतना हलचल भरा रहा कि शायद ही कोई हफ्ता ऐसा गया हो जब उनका कोई बड़ा फैसला सुर्खियों में न रहा हो। चाहे अर्थव्यवस्था हो, इमिग्रेशन हो या विदेश नीति, ट्रंप ने हर मोर्चे पर अपने अलग अंदाज में दुनिया को चौंकाया।

सरकार छोटा करने की मुहिम और एलन मस्क की एंट्री

सत्ता संभालते ही ट्रंप ने सरकारी ढांचे को छोटा करने का अभियान शुरू किया। पहले ही दिन डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) बनाया गया, जिसकी कमान अरबपति कारोबारी एलन मस्क को दी गई। इस विभाग ने हजारों सरकारी नौकरियों पर कैंची चलाई और कई मंत्रालयों का बजट घटा दिया। सबसे ज्यादा मार USAID पर पड़ी, जिसे लगभग खत्म ही कर दिया गया।

अवैध प्रवासियों पर सबसे सख्त कार्रवाई

ट्रंप ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की। 19 गैर-यूरोपीय देशों के नागरिकों पर अमेरिका में एंट्री बैन लगाया गया, हजारों वीजा रद्द किए गए और नए वीजा पर रोक लगा दी गई। बड़े शहरों में ICE रेड रोज की बात बन गई। वेनेजुएला के गैंग सदस्यों को देश से बाहर निकाला गया, जिससे कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन भी हुए।

टैरिफ बम से हिला ग्लोबल ट्रेड

ट्रंप ने वैश्विक व्यापार पर सीधा हमला बोला। चीन, कनाडा और मैक्सिको पर टैरिफ लगाए गए। अप्रैल में ‘लिबरेशन डे’ घोषित कर लगभग सभी देशों पर 10 प्रतिशत न्यूनतम टैरिफ ठोक दिया गया। भारत जैसे देशों पर यह टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। ट्रंप का साफ संदेश था कि अमेरिका को नुकसान पहुंचाने वालों को भारी कीमत चुकानी होगी।

इजरायल-हमास संघर्ष में कूटनीतिक जीत

मध्य पूर्व में इजरायल-हमास युद्ध को लेकर ट्रंप ने कूटनीतिक बढ़त बनाई। 2023 से चल रहे इस खूनी संघर्ष में हजारों जानें जा चुकी थीं। ट्रंप की पहल पर सीजफायर हुआ और गाजा के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का गठन किया गया। हालांकि रूस-यूक्रेन युद्ध को पहले दिन खत्म करने का उनका दावा अब तक पूरा नहीं हो सका।

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हर 90 दिन में किसी नए देश पर दबाव

ट्रंप की विदेश नीति का सबसे बड़ा चेहरा रहा हर 90 दिन में किसी नए देश पर दबाव बनाना। वेनेजुएला, नाइजर, आर्मेनिया और सीरिया इसके उदाहरण रहे। जनवरी 2026 में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका लाया गया। वहीं ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों को टैरिफ की धमकी दी गई।

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