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Gold Carat Meaning in Hindi: क्यों होता है सोना सिर्फ 18, 22 और 24 कैरेट का? 19, 21 या 25 कैरेट क्यों नहीं — जानिए इसका चौंकाने वाला कारण

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Gold Carat Meaning in Hindi: सोना भारतीय संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा रहा है। शादी-ब्याह हो या त्योहार, सोने के जेवरात हर मौके की रौनक बढ़ा देते हैं। भारत में सोने को न सिर्फ गहनों के रूप में, बल्कि एक निवेश के रूप में भी देखा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सोना सिर्फ 18, 22 या 24 कैरेट का ही क्यों होता है? 19, 21 या 25 कैरेट क्यों नहीं? चलिए जानते हैं इसका असली कारण।

कैरेट क्या होता है?

सोने की शुद्धता (Purity) को मापने की इकाई को कैरेट (Carat) कहा जाता है। 24 कैरेट सोना 100% शुद्ध सोना माना जाता है, यानी इसमें किसी अन्य धातु की मिलावट नहीं होती। लेकिन शुद्ध सोना बहुत नरम (soft) होता है, जिससे इससे गहने बनाना मुश्किल हो जाता है।

18 और 22 कैरेट में क्या अंतर होता है?

22 कैरेट सोना 22 भाग शुद्ध सोना और 2 भाग अन्य धातु (जैसे तांबा, चांदी या जिंक) से मिलकर बना होता है। यह लगभग 91.67% शुद्ध सोना होता है। वहीं 18 कैरेट सोना 18 भाग सोना और 6 भाग अन्य धातु का मिश्रण होता है, यानी यह करीब 75% शुद्ध सोना होता है।

22 कैरेट सोना परंपरागत गहनों के लिए बढ़िया माना जाता है, जबकि 18 कैरेट सोना डिज़ाइनर और फैशन ज्वेलरी में ज्यादा इस्तेमाल होता है क्योंकि यह ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होता है।

24 कैरेट सोना क्यों नहीं बनते गहने?

24 कैरेट सोना बहुत मुलायम होता है, इसलिए इससे ज्वेलरी बनाना व्यावहारिक नहीं होता। यह अक्सर सिक्के या सोने की ईंटों (Gold Coins & Bars) में इस्तेमाल होता है। अगर इससे गहने बनाए जाएं, तो वे आसानी से मुड़ या टूट सकते हैं। इसलिए 22 या 18 कैरेट सोना ही सबसे उपयुक्त होता है।

तो फिर 19, 21 या 25 कैरेट सोना क्यों नहीं होता?

भारत में BIS (Bureau of Indian Standards) के अनुसार, सोने की शुद्धता के लिए केवल 14, 18, 22 और 24 कैरेट को ही आधिकारिक मान्यता दी गई है। यानी 19, 21 या 25 कैरेट जैसी श्रेणियां मानक नहीं मानी जातीं। इसलिए इन पर हॉलमार्किंग (Hallmarking) भी नहीं की जाती, जिससे उनकी शुद्धता की गारंटी नहीं मिलती।

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हॉलमार्किंग क्या है और क्यों जरूरी है?

हॉलमार्किंग एक प्रमाण पत्र है जो BIS द्वारा जारी किया जाता है, जो बताता है कि आपके सोने की शुद्धता कितनी है। भारत में फिलहाल 14, 18 और 22 कैरेट सोने पर ही हॉलमार्किंग की अनुमति है। इससे ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाव होता है और उन्हें शुद्ध सोना खरीदने की गारंटी मिलती है।

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