खबरवाणी
अवैध शराब बिक्री के खिलाफ आदिवासी महिलाओं ने थाने में की शिकायत
महिलाओं ने शराब की पेटियां सड़क पर फेंकी
विदिशा / गंजबासौदा, नितीश श्रीवास्तव। प्रदेश के आदिवासी समुदाय के लोगों को समाज की मुख्य धारा में जोड़ने एवं उनके जीवन स्तर को उच्चतम बनाने हेतु सरकार द्वारा तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं, तो वहीं दूसरी और आबकारी विभाग, स्थानीय पुलिस, और शराब ठेकेदार की मिलीभगत से आदिवासी समुदाय को नशे की गर्त में धकेला जा रहा है। जिसका ताजा मामला गंजबासौदा जनपद की ग्राम पंचायत मसूदपुर की आदिवासी बस्ती में शनिवार को देखने को मिला। जब वहां की जागरूक आदिवासी महिलाओं ने अवैध शराब के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए देहात थाने में लिखित शिकायत की एवं अवैध शराब के कारोबार को बंद करने एवं अवैध शराब के कारोबारियों पर कार्यवाही करने की मांग का आवेदन दिया। आपको बता दें कि अवैध शराब का कारोबार ग्रामीण क्षेत्रों में जोरों पर चल रहा है, जिस पर ना तो आबकारी विभाग रोक लगा पा रहा है ना ही पुलिस विभाग। हालात यह है कि गांव-गांव, गली-गली सहजता से उपलब्ध होने के चलते नाबालिग भी अब इसकी चपेट में आने लगे हैं। परिवारों में शराब को लेकर आए दिन लड़ाई झगड़ा, मारपीट होने लगी है। रोज की कलह और मारपीट से त्रस्त होकर जनपद की ग्राम पंचायत मसूदपुर की आदिवासी बस्ती की लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक महिलाओं ने शनिवार को शहर के देहात थाना पहुंचकर अवैध शराब बिक्री एवं इसमें संलग्न व्यक्तियों के खिलाफ नामजद शिकायत करते हुए कार्यवाही की मांग की।
बस्ती में चार पहिया वाहन से सप्लाई
महिलाओं ने बताया कि उनके पति कोई काम धाम नहीं करते दिन भर शराब के नशे में डूबे रहते हैं और जब हम दिनभर मजदूरी करने के बाद शाम को घर आते हैं तो पति शराब के लिए रुपए मांगते हैं नहीं देने पर मारपीट करते हैं। कई महिलाओं ने पतियों द्वारा की गई मारपीट के निशान भी बताएं। लाड़ली बहना योजना के रुपए भी उनके पति शराब पीने के लिए मारपीट कर छुडा लेते हैं। दिए गए लिखित शिकायती आवेदन कहा गया है कि ग्रामीण इलाकों में खुलेआम शराब की बिक्री हो रही है जिससे स्थानीय आदिवासी और सहरिया समुदाय में भारी आक्रोश है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब नाबालिग स्कूलों के बच्चे भी शराब की लत में पड़ गए हैं। महिलाओं ने बताया कि गाँव में फोर व्हीलर वाहनों से रोज शराब की सप्लाई होती है और खुलेआम बिक्री की जाती है, लेकिन प्रशासन मौन है। आदिवासी और सेहरिया समुदाय की महिलाओं ने कहा कि उनके बच्चे अब स्कूल जाने के बजाय नशे की लत में फंसते जा रहे हैं। गांव में बिक रही शराब से परेशान आदिवासी महिलाओं ने शनिवार को फोर व्हीलर से उतर रही शराब पेटियां का रोकने का प्रयास किया और सड़क पर शराब की पेटी फेंक दी और शराब को बंद कराने के लिए गांव में प्रदर्शन भी किया। इसके बाद आदिवासी सहरिया ग्रामीण महिलाएं देहात थाना पहुंची। मांग की अवैध रूप से बिक रही शराब को तत्काल बंद किया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि हमारा परिवार टूटने से बच सकें। शिकायत करने वालों में प्रेम बाई सहरिया, भूरी बाई, गुड्डी, शारदा, लक्ष्मी, तुलसा बाई, मोती बाई, भगवती सहरिया, फूल बाई, उमा सहरिया, हरि बाई, मोहर बाई आदिवासी आदि हैं।






