एलन मस्क की सोशल मीडिया कंपनी X (पूर्व में ट्विटर) ने भारत सरकार के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। कंपनी का कहना है कि सरकार की ओर से डाले जा रहे दबाव और मांगी जा रही जानकारी संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
सरकार के खिलाफ कोर्ट पहुँची X
कंपनी ने याचिका दायर करते हुए कहा कि सरकार अत्यधिक और गैरज़रूरी जानकारी मांग रही है। X का दावा है कि यह यूज़र्स की प्राइवेसी का उल्लंघन है और इससे लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला हो रहा है।
अनुच्छेद 19(1)(a) और 21 का हवाला
X ने अपनी याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 21 का जिक्र किया है।
- अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है।
- अनुच्छेद 21 नागरिकों को जीवन और निजता का अधिकार प्रदान करता है।
कंपनी का कहना है कि सरकार इन अधिकारों का उल्लंघन कर रही है।
सरकार की सूचना मांग पर सवाल
X का आरोप है कि सरकार लगातार ऐसे आदेश भेज रही है, जिनमें नागरिकों की निजी जानकारी और डेटा की मांग की जा रही है। कंपनी का कहना है कि इस तरह की जानकारी न केवल अत्यधिक है बल्कि यूज़र्स की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती है।
कर्नाटक हाईकोर्ट में न्याय की गुहार
कंपनी ने कर्नाटक हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि सरकार के इस आदेश को संविधान-विरोधी घोषित किया जाए। याचिका में कहा गया है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में फ्री स्पीच और डेटा प्राइवेसी को सुरक्षित रखना बेहद ज़रूरी है।
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मामला बन सकता है बड़ा विवाद
एलन मस्क की कंपनी X और भारत सरकार के बीच यह विवाद आने वाले समय में बड़ा रूप ले सकता है।
- एक तरफ सरकार नेशनल सिक्योरिटी और रेगुलेशन की बात कर रही है।
- दूसरी तरफ X का कहना है कि यह कदम लोकतंत्र और प्राइवेसी पर हमला है।





