World Diabetes Day: हर साल 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज़ डे मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को डायबिटीज़ जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करना और इसके सही इलाज व नियंत्रण के लिए प्रेरित करना है। इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन (IDF) के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, 11.1% यानी हर 9 में से 1 वयस्क व्यक्ति (20 से 79 वर्ष की उम्र में) डायबिटीज़ से पीड़ित है। डायबिटीज़ को जीवनशैली और खानपान सुधारकर कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन कुछ आम गलतियां इस बीमारी को और बिगाड़ देती हैं।
मीठा ही नहीं, कार्बोहाइड्रेट भी है असली वजह
डॉ. शालिनी सिंह सालुंके के मुताबिक, ज्यादातर डायबिटीज़ मरीज़ सिर्फ मीठा खाने को ही जिम्मेदार मानते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि डायबिटीज़ सिर्फ मिठाई से नहीं बल्कि ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाने से होती है। सफेद चावल, ब्रेड, आलू या रिफाइंड फूड्स शुगर लेवल बढ़ाते हैं। इसलिए डॉक्टर सलाह देती हैं कि ऐसे फूड्स से दूरी बनाएं और अपनी डाइट में फाइबर व प्रोटीन बढ़ाएं।
खाना छोड़ना या गलत तरीके से उपवास करना
डायबिटीज़ के मरीज़ों की एक आम गलती होती है – भोजन छोड़ देना या गलत उपवास करना। ऐसा करने से शरीर को स्ट्रेस होता है और कॉर्टिसोल लेवल बढ़ जाता है, जिससे शुगर लेवल और बढ़ने लगता है। डॉक्टर शालिनी के अनुसार, डायबिटीज़ कंट्रोल के लिए भोजन समय पर और संतुलित मात्रा में लेना जरूरी है।
रात में खाना देर से खाना या भूल जाना
कई मरीज़ रात में बहुत देर से खाना खाते हैं या कभी-कभी खाना छोड़ देते हैं। इससे ब्लड शुगर लेवल रात में अस्थिर हो जाता है। डॉक्टर बताती हैं कि सोने से 2 घंटे पहले हल्का भोजन करना और देर रात खाने से बचना डायबिटीज़ कंट्रोल में बहुत मदद करता है।
सिर्फ फास्टिंग शुगर टेस्ट करवाना
डॉ. शालिनी कहती हैं कि ज्यादातर लोग सिर्फ फास्टिंग शुगर टेस्ट करवाते हैं और इसी को पर्याप्त समझते हैं। लेकिन सिर्फ यह टेस्ट आपकी स्थिति नहीं बताता। इसके साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस टेस्ट और HbA1c टेस्ट करवाना भी जरूरी है ताकि यह पता चले कि शरीर इंसुलिन पर कैसे प्रतिक्रिया दे रहा है।
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सिर्फ दवाओं पर निर्भर रहना
कई लोग सोचते हैं कि डायबिटीज़ सिर्फ दवाओं से कंट्रोल हो जाएगी। जबकि सच्चाई यह है कि लाइफस्टाइल में सुधार, डाइट कंट्रोल और नियमित एक्सरसाइज ही असली इलाज हैं। डॉक्टर का कहना है कि अगर आप सिर्फ दवा पर निर्भर रहेंगे तो ब्लड शुगर अस्थायी रूप से तो घटेगा लेकिन बीमारी जड़ से खत्म नहीं होगी।





