भारत में हर राज्य की अपनी अलग पहचान है। कहीं संस्कृति मशहूर है तो कहीं उद्योग और कारोबार। लेकिन जब बात लोगों की कमाई यानी Per Capita Income (प्रति व्यक्ति आय) की आती है, तो तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है। RBI Handbook 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार कुछ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं जहाँ लोगों की औसत कमाई देश के बाकी हिस्सों से काफी ज्यादा है। हैरानी वाली बात यह है कि इस लिस्ट में यूपी और बिहार काफी पीछे हैं।
दिल्ली बना देश का सबसे अमीर क्षेत्र
देश की राजधानी Delhi प्रति व्यक्ति आय के मामले में सबसे ऊपर है। यहां प्रति व्यक्ति आय करीब ₹4.93 लाख बताई गई है। इसका मतलब यह है कि दिल्ली में रहने वाले व्यक्ति की औसतन सालाना कमाई देश के कई बड़े राज्यों से कहीं ज्यादा है। नौकरी, बिजनेस, आईटी सेक्टर और सरकारी संस्थानों की भरमार दिल्ली को आर्थिक रूप से बेहद मजबूत बनाती है।
तेलंगाना और कर्नाटक ने सबको चौंकाया
Telangana और Karnataka इस सूची में दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। तेलंगाना की प्रति व्यक्ति आय लगभग ₹3.87 लाख और कर्नाटक की ₹3.80 लाख है। बेंगलुरु जैसे आईटी हब की वजह से कर्नाटक की कमाई तेजी से बढ़ी है। वहीं हैदराबाद ने तेलंगाना को टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप का बड़ा सेंटर बना दिया है।
तमिलनाडु और हरियाणा भी दौड़ में आगे
Tamil Nadu और Haryana भी इस लिस्ट में मजबूत स्थिति में हैं। तमिलनाडु की प्रति व्यक्ति आय ₹3.61 लाख और हरियाणा की ₹3.53 लाख के करीब है। फैक्ट्री, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और खेती—इन तीनों का दम इन राज्यों की अर्थव्यवस्था को ताकत देता है। हरियाणा में दिल्ली से सटे इलाकों का भी बड़ा योगदान माना जाता है।
महाराष्ट्र बड़ा आर्थिक राज्य, फिर भी पीछे
Maharashtra देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य माना जाता है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में यह टॉप पर नहीं है। यहां प्रति व्यक्ति आय करीब ₹3.09 लाख है। इसके बाद Kerala, Puducherry, Uttarakhand और Andhra Pradesh का नाम आता है। इन राज्यों ने शिक्षा, पर्यटन और उद्योग के दम पर अच्छी आर्थिक तरक्की हासिल की है।
यूपी-बिहार और मध्य प्रदेश की हालत कैसी?
Uttar Pradesh और Bihar इस सूची में सबसे नीचे हैं। बिहार की प्रति व्यक्ति आय सिर्फ ₹69,321 बताई गई है, जबकि यूपी की ₹1.08 लाख के आसपास है। वहीं Madhya Pradesh का कुल आर्थिक उत्पादन अच्छा होने के बावजूद प्रति व्यक्ति आय करीब ₹1.52 लाख है। इससे साफ पता चलता है कि केवल बड़ी आबादी या बड़ा राज्य होना ही अमीरी की गारंटी नहीं देता, बल्कि लोगों तक आर्थिक फायदा पहुंचना ज्यादा जरूरी है।
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