स्किन हमारे शरीर का सबसे बड़ा और सबसे संवेदनशील अंग होता है, जो सीधा बाहरी वातावरण के संपर्क में रहता है। इसलिए त्वचा पर दाने, खुजली, लालपन, छिलना, दाद, scabies और एलर्जी जैसी समस्याएँ होना आम बात है। यह सभी समस्याएँ मिलकर स्किन डिज़ीज़ यानी त्वचा रोग कहलाती हैं। स्किन डिज़ीज़ न सिर्फ शारीरिक तकलीफ देती हैं, बल्कि कई बार मानसिक तनाव और शर्मिंदगी का कारण भी बन जाती हैं। इसलिए इनके कारण जानना और समय पर बचाव करना बहुत ज़रूरी है।
इंफेक्शन से शुरू होती हैं कई स्किन प्रॉब्लम्स
त्वचा पर इंफेक्शन स्किन डिजीज़ का सबसे आम कारण है। जब त्वचा के पोर्स या हेयर फॉलिकल में बैक्टीरिया फंस जाते हैं, तब पिंपल, फोड़े या अन्य इंफेक्शन हो सकते हैं। फंगस की वजह से दाद, खुजली और ringworm जैसे रोग फैलते हैं। इसके अलावा माइट्स और अन्य परजीवी scabies का कारण बनते हैं, जबकि वायरस की वजह से herpes और chickenpox जैसी बीमारियां हो सकती हैं। गर्मी और पसीने में यह संक्रमण और तेज़ी से फैलता है।
जेनेटिक्स और कमज़ोर इम्युनिटी भी बनती है वजह
कई त्वचा रोग परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चलते हैं, जैसे psoriasis और atopic dermatitis यानी eczema। अगर परिवार में किसी को यह समस्या रही है, तो आगे आने वाली पीढ़ियों में इसके चांस बढ़ जाते हैं। वहीं कमज़ोर इम्यून सिस्टम या ऑटोइम्यून कंडीशन में शरीर खुद अपनी त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है, जिससे लाल दाने, रैशेज़ और सूजन की दिक्कत शुरू होती है।
हार्मोनल बदलाव, केमिकल्स और धूप भी करते हैं असर
किशोरावस्था, पीरियड्स और प्रेग्नेंसी के समय हार्मोन तेजी से बदलते हैं, जिससे पिंपल और स्किन डिजीज़ बढ़ जाती हैं। ज्यादा केमिकल वाले साबुन, ब्लीच, लोशन और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं। धूप में ज्यादा देर रहने से सनबर्न, टैनिंग और रिंकल्स की समस्या बढ़ती है। तनाव, चिंता, नींद की कमी और खराब खानपान भी त्वचा रोगों की बड़ी वजह बनते हैं।
स्किन डिज़ीज़ से बचाव कैसे करें
त्वचा को साफ रखें और पसीना होने पर तुरंत नहाएं। सूखे और साफ कपड़े पहनें। त्वचा को मॉइस्चराइज रखना बहुत ज़रूरी है, इसलिए रोज़ क्रीम या तेल लगाएं। रोज़ पर्याप्त पानी पिएं ताकि स्किन भीतर से हाइड्रेट रहे। धूप में निकलते समय स्किन को कपड़ों या सनस्क्रीन से बचाएं। दूसरों के तौलिये, कंघी या कपड़े इस्तेमाल न करें। तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान या गहरी सांस लेने के अभ्यास करें।





