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कच्चे बिल का खेल, हजारों की खरीदी-बिक्री पर जीएसटी को नुकसान

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खबरवाणी

कच्चे बिल का खेल, हजारों की खरीदी-बिक्री पर जीएसटी को नुकसान

बुरहानपुर
शहर के कपड़ा बाजार में इन दिनों खरीदी-बिक्री तो हजारों और लाखों रुपये की हो रही है, लेकिन कई व्यापारियों द्वारा ग्राहकों को पक्का बिल देने के बजाय कच्चा बिल दिया जा रहा है। इस कारण सरकार को मिलने वाला जीएसटी राजस्व प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। टैक्स बचाने के प्रयास में कुछ दुकानदार ग्राहकों को बिना जीएसटी वाला कच्चा बिल थमा देते हैं, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंच सकता है।
सुत्रो से मीली जानकारी के अनुसार बुरहानपुर के प्रमुख कपड़ा बाजारों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कपड़ों की खरीद-बिक्री होती है। शादी-विवाह, त्योहार और अन्य अवसरों के चलते ग्राहक हजारों रुपये तक के कपड़े खरीदते हैं, लेकिन कई मामलों में ग्राहकों को जीएसटी सहित पक्का बिल नहीं दिया जाता। इसके बजाय दुकानदार साधारण कागज या बिना टैक्स विवरण वाला कच्चा बिल देकर लेन-देन पूरा कर लेते हैं।
व्यापारिक जानकारों का कहना है कि पक्का बिल देने पर दुकानदार को जीएसटी नियमों के अनुसार टैक्स जमा करना पड़ता है, जबकि कच्चा बिल देने से टैक्स का पूरा हिसाब रिकॉर्ड में नहीं आता। इससे सरकार के राजस्व पर असर पड़ सकता है। कई ग्राहक भी जानकारी के अभाव में या कम कीमत के लालच में कच्चा बिल लेकर ही संतुष्ट हो जाते हैं।
शहर के कुछ जागरूक नागरिकों का कहना है कि इस प्रकार की व्यवस्था लंबे समय से चल रही है। यदि नियमित रूप से जांच हो तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। नागरिकों का मानना है कि पक्का बिल मिलने से ग्राहक को भी कई फायदे होते हैं, जैसे सामान की गुणवत्ता या गारंटी को लेकर भविष्य में कोई विवाद होने पर बिल एक प्रमाण के रूप में काम करता है।
नियम क्या कहते हैं
कर विशेषज्ञों के अनुसार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) नियमों के तहत पंजीकृत व्यापारी द्वारा किसी भी वस्तु की बिक्री पर जीएसटी सहित विधिवत टैक्स इनवॉइस देना अनिवार्य है। बिल में व्यापारी का जीएसटी नंबर, वस्तु का विवरण, कीमत और टैक्स की जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए। यदि कोई व्यापारी जानबूझकर ऐसा नहीं करता तो यह नियमों के विरुद्ध माना जा सकता है।

ग्राहकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राहकों को भी खरीदारी करते समय पक्का बिल मांगना चाहिए। इससे न केवल लेन-देन पारदर्शी रहेगा बल्कि कर व्यवस्था भी मजबूत होगी। कई बार ग्राहक खुद भी बिल नहीं लेते, जिससे ऐसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलता है।

सम्बंधित निगरानी की अपेक्षा
स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों पर निगरानी रखने वाले विभागों से अपेक्षा की जा रही है कि समय-समय पर बाजारों में जांच अभियान चलाए जाएं और जीएसटी नियमों के पालन को सुनिश्चित किया जाए। इससे ईमानदार व्यापारियों को भी लाभ मिलेगा और कर व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहेगी।

बुरहानपुर जैसे व्यस्त व्यापारिक शहर में कपड़ा कारोबार का दायरा काफी बड़ा है। ऐसे में यदि सभी व्यापारी नियमों के अनुसार पक्का बिल दें और ग्राहक भी इसे लेने के प्रति जागरूक रहें, तो न केवल सरकारी राजस्व सुरक्षित रहेगा बल्कि व्यापारिक व्यवस्था भी अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बन सकेगी।

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