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Patni Pidit Pati – पति ने पत्नी को रंगे हाथों पकड़ा तो उसी की हुई पिटाई, एक मंच पर जुटे पत्नी पीडि़तों ने सुनाई व्यथा  

जिले में शनिवार शाम को मनाया इंटरनेशनल मेन्स डे

बैतूल – Patni Pidit Pati – जिले के इतिहास में पहली बार इंटरनेशनल मेन्स डे का आयोजन किया गया। इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें पत्नी जहां बड़ी संख्या में शामिल हुए वहीं उन्होंने खुलकर अपनी प्रताडऩा भी बताई। आयोजन का उद्देश्य ऐसे पुरूषों को कानूनी सहायता देने सहित मदद करना है जो कि पत्नी से पीडि़त है लेकिन कहीं शिकायत नहीं कर पा रहे हैं। आयोजन के दौरान एक व्यक्ति ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि जब वह टूर से लौटा तो उसकी पत्नी उसके प्रोफेसर दोस्त के साथ आपत्तिजनक स्थिति में थी। दोनों उसे देखते ही भडक़ गए और उसकी पिटाई कर दी। तब से लेकर आज तक वह प्रताडऩा झेल रहे है।

हल निकालने की गई चर्चा(Patni Pidit Pati)

इंटरनेशल मेंस डे पर आयोजित कार्यक्रम में शहर के पत्नी पीडि़तों के साथ-साथ शहर के गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे। सभी ने इसे एक अच्छी पहल बताते हुए कहा कि इस तरह से पीडि़तों को जहां मदद मिलेगी वहीं उन्हें कानूनी सहायता भी उपलब्ध हो सकेगी। अभी तक व्यक्ति प्रताडऩा को अपने मन में ही रखता था लेकिन अब संगठन के बन जाने से लोग अपनी प्रताडऩा की खुलकर चर्चा करने लगे हैं जिससे इसका हल निकालना भी आसान हो जाएगा। इसी को लेकर एक बैठक भी की गई जिसमें विस्तृत विचार विमर्श किया गया। आयोजन में परिवार परामर्श केंद्र के सदस्यों को भी काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया था। आयोजन में बैतूल ही नहीं, प्रदेश के दूसरे जिलों से भी पत्नी प्रताडि़त पुरुष आए। जिन्होंने अपनी आपबीती शेयर की।

बुजुर्ग माता-पिता को करनी लगी थी परेशान(Patni Pidit Pati)

पत्नी पीडि़तों को मंच उपलब्ध होने से उन्होंने खुलकर अपनी व्यथा बताई। एक व्यक्ति ने बताया कि 2017 में उसने लव मैरिज की थी। शुरू-शुरू में सब कुछ ठीक रहा लेकिन उसके बाद पत्नी की डिमांड बढ़ती गई और मैं पूरा करता रहा लेकिन वह कभी संतुष्ट नहीं हुई। वह मुझे घर से अलग करने के लिए दबाव बनाने लगी और मेरे बुजुर्ग माता-पिता को भी प्रताडि़त करना शुरू कर दिया था। वह अपने साथ मेरी बेटी को लेकर भी चली गई है। उल्टा मुझ पर ही दहेज प्रताडऩा का मामला दर्ज करा दिया गया है। मामला कोर्ट में है मैं तलाक लेना चाहता हूं।  3

पुरूषों की कहीं नहीं होती सुनवाई(Patni Pidit Pati)

मेरी शादी 2012 में हुई थी। कुछ साल तो हम अच्छे से साथ रहे, लेकिन चार-पांच साल बाद वह छोटी-छोटी बात पर झगड़ा करने लगी। मुझ पर ससुराल में रहने का दबाव बनाने लगी। फिर उसने अपने मां-बाप के सिखाने पर मेरे खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करवा दिया। इसके पहले मैंने थाने में कई आवेदन दिए थे। कोई सुनवाई नहीं हुई। समाज के पास भी गया। समाज की बैठक भी हुई, लेकिन जब उसने एफआईआर करवा दी, तो समाज ने भी मुझसे किनारा कर लिया। दो साल मायके में रहने के बावजूद मुझ पर दहेज प्रताडऩा का मामला दर्ज करवा दिया। अब मुझ पर भरण-पोषण का केस लगा दिया है। हर जगह महिला की ही सुनवाई होती है। मेरी कहीं नही सुनी जा रही।

दहेज प्रताडऩा का दर्ज करवा दिया मामला(Patni Pidit Pati)

मैं इंजीनियर हूं। शादी 2017 में हुई थी। कुछ दिन तो ठीक चला, पर बाद में छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने लगा। पत्नी के मां-बाप जैसा कहते, वो वैसी कारगुजारियां यहां करती। एक साल पहले दहेज प्रताडऩा का मामला दर्ज करवा दिया। न तो मैंने दहेज मांगा और न मेरे घरवालों ने। मैं और मेरी पत्नी तो एक होना चाहते हैं, लेकिन मेरे सास-ससुर हमारे जीवन में इतना दखल देते हैं कि हमें एक नहीं होने दे रहे। मेरी पत्नी के दिमाग में शक का ऐसा कीड़ा डाल दिया गया है कि वह उससे बाहर नहीं आ पा रही है।

आत्महत्या करने बना लिया था मन(Patni Pidit Pati)

मैं धार जिले का रहने वाला हूं। मुझ पर आरोप है कि मैं पत्नी को मानसिक रूप से प्रताडि़त करता हूं। मैं बच्चे को छीनना चाहता हूं। मैं शराब पीता हूं। बच्चे को मारता हूं, लेकिन मैं ऐसा नहीं हूं। वह मेरे मां-बाप को गाली देती है। मैं इतने डिप्रेशन में हूं कि एक बार ट्रेन से कूदकर जान देने जैसा विचार भी आ चुका है। अब मुझ पर झूठे केस डाल दिए गए हैं।

बैठक में आए प्रताडऩा के 15 प्रकरण(Patni Pidit Pati)

सेव इंडियन फैमिली संस्था के समन्वयक डॉक्टर संदीप गोहे ने बताया कि हमारे पास अलग-अलग तरह से प्रताडि़त पुरुष आते हैं। हम पुरुषों के लिए काम करते हैं। आज हमारे पास 15 केस आए हैं। हम दो तरह से मदद करते हैं। पहला- उन्हें मोरली सपोर्ट करते हैं, ताकि वे डिप्रेशन से बचें। किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल न हो जाएं। दूसरा- कानूनी रूप से उनकी मदद करते हैं। उन्हें गाइड करते हैं कि केस को कैसे फेस करना है। हम महिला विरोधी नहीं हैं, लेकिन उन महिलाओं के खिलाफ हैं, जो झूठा केस लगवाती हैं। पुरुषों के लिए भी एक आयोग बनाना चाहिए।

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