लश्करे परिवार ने रचा इतिहास, एक ही परिवार में पांच डॉक्टर

Khabarvani special: बैतूल। एक समय था चिकित्सा के क्षेत्र में बैतूल जिला काफी पिछड़ा हुआ था और गंभीर मरीजों को इलाज के लिए नागपुर और भोपाल ले जाना पड़ता था। अब जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ती जा रही हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाने वाले लश्करे परिवार ने जिले में इतिहास रचा है। उनके परिवार में अब पांच डॉक्टर हो गए हैं और चिकित्सा के क्षेत्र में तीसरी पीढ़ी सेवा देने के लिए उतर गई है। लश्करे परिवार के तीसरे पीढ़ी के डॉक्टर अंकुर लश्करे ने जिला चिकित्सालय में सेवाएं देना शुरू कर दी हैं।
तीसरी पीढ़ी की शुरूवात
बैतूल में प्रतिष्ठित लश्करे परिवार में सबसे पहले डॉ. धरमचंद लश्करे ने अस्पताल खोलकर बैतूल के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देना शुरू की थी। इसके बाद उनके बेटे डॉ. मनीष लश्करे ने इस अस्पताल को आगे बढ़ाया और हृदय रोग के मरीजों को उपचार देना प्रारंभ किया। इसके बाद लश्करे परिवार की बहू बनकर आई डॉ. श्रीमती नमिता लश्करे जनरल फिजिशियन के रूप में चिकित्सा के क्षेत्र में सेवाएं दे रही हैं। अब इस परिवार की तीसरी पीढ़ी के रूप में डॉ. मनीष और डॉ. श्रीमती नमिता लश्करे के बेटे डॉ. अंकुर लश्करे ने जिला चिकित्सालय में ज्वाइन कर सेवाएं देना प्रारंभ कर दिया है।
1955 में किया था एमएस
डॉ. धरमचंद लश्करे जिनकी वर्तमान में आयु 92 वर्ष है उन्होंने 1955 में एमएस कर आर्मी मेडिकल कोर हास्पिटल में सबसे पहले सेवाएं देना शुरू की। उस समय चीन-पाकिस्तान युद्ध हुआ था और वे आर्मी हास्पिटल जो चाइना बार्डर पर है वहां पदस्थ थे। 1968 में डॉ. धरमचंद लश्करे अस्टिेंट सर्जन के रूप में जिला चिकित्सालय में पदस्थ हुए। इसके बाद उन्होंने खरगोन, देवास और उज्जैन के सरकारी अस्पतालों में सर्जिकल स्पेशलिस्ट के रूप मेें सेवाएं दी। 1980 में बैतूल जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन एवं सीएमएचओ के पद पर पदस्थ हुए थे। उस समय ये दोनों पद कॉमन हुआ करते थे। 1987 में उनकी पदोन्नति हुई और ज्वाइंट डायरेक्ट के पद पर भोपाल तबादला हो गया था। उस समय उन्होंने स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेकर लश्करे चिकित्सालय की स्थापना की थी।
पहली हृदय रोग गहन चिकित्सा यूनिट
बैतूल में पहली हृदय रोग गहन चिकित्सा यूनिट की शुरूवात 1997 में लश्करे चिकित्सालय में शुरू हुई थी। यह यूनिट डॉ. मनीष लश्करे ने शुरू की थी। वर्तमान में उनकी आयु 55 वर्ष है और उन्होंने अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए चिकित्सा के क्षेत्र में जाने का निर्णय लिया और 1987 में उनका जबलपुर मेडिकल कालेज में एमबीबीएस में एडमिशन हुआ था। इसके बाद 1994 में गांधी मेडिकल कालेज हमीदिया हास्पिटल भोपाल से मेडिसिन में एमडी की थी। डिग्री लेने के बाद उन्होंने लश्करे चिकित्सालय में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाते हुए हृदय रोग गहन चिकित्सा यूनिट की शुरूवात की जिसके कारण हार्ट पेशेंटों को बैतूल में ही इलाज मिलना शुरू हो गया। डॉ. मनीष लश्करे की पत्नी डॉ. नमिता लश्करे भी एमबीबीएस हैं और लश्करे चिकित्सालय में जनरल फिजिशयन के रूप में सेवाएं दे रही हैं।
अनुज कर रहे कार्डियोलॉजी में डीएम
डॉ. धरमचंद लश्करे की तीसरी पीढ़ी में डॉ. मनीष-डॉ. नमिता लश्करे के दोनों बेटे अनुज और अंकुर भी डॉक्टर ही हैं। इनमें से बड़े बेटे अनुज लश्करे जिन्होंने अपने दादा और पिता के ही पद चिन्हों पर ही आगे बढ़ते हुए चिकित्सा के क्षेत्र में ही जाने का निर्णय लिया और 2014 में उनका चिरायु मेडिकल कालेज में एमबीबीएस के लिए एडमिशन हुआ। इसके बाद उन्होंने अरविंदो इंस्टीट्यूट इंदौर से मेडिसिन में एमडी पूरी की। 2023 में डिग्री पूर्ण होने के बाद उन्होंने कार्डियोलॉजी में डीएम करने के लिए विश्व की प्रतिष्ठित यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलाजी अहमदाबाद में एडमिशन लिया है। यह कोर्स चार साल का है। अभी उनको एक साल हो गए हैं। तीन साल बाद उनकी भी सेवाएं बैतूलवासियों को मिलेगी।
अंकुर जिला चिकित्सालय में पदस्थ
डॉ. धरमचंद लश्करे के तीसरे पीढ़ी के डॉ. अंकुर लश्करे ने हाल ही में जिला चिकित्सालय में सेवाएं देना शुरू कर दी हैं। डॉ. अंकुर लश्करे का 2018 में इंदौर के एमजीएम मेडिकल कालेज में एडमिशन हुआ था और उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर ली है। डॉ. मनीष लश्करे ने बताया कि अंकुर अभी जिला चिकित्सालय में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बाद मेडिसिन में एमडी करने के लिए इंदौर जाएंगे।





