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Kaalchakra: कुंडली में कमजोर मंगल बना सकता है कंगाल, अपनाएं ये देसी उपाय और पाएं तरक्की

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Kaalchakra: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति का इंसान की जिंदगी पर गहरा असर माना जाता है। खास तौर पर मंगल ग्रह को शक्ति, साहस, जोश और आत्मविश्वास का कारक माना गया है। अगर कुंडली में मंगल कमजोर हो जाए, तो व्यक्ति को आर्थिक तंगी, झगड़े और असफलताओं का सामना करना पड़ सकता है। आज के कालचक्र में जानते हैं प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय से कि कमजोर मंगल के क्या लक्षण होते हैं और उसे मजबूत करने के आसान देसी उपाय कौन से हैं।

मंगल ग्रह का महत्व क्या है

मंगल को ग्रहों का सेनापति कहा गया है। यह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी होता है। मकर राशि में मंगल उच्च का और कर्क राशि में नीच का माना जाता है। मंगल व्यक्ति के भीतर जोश, मेहनत, हिम्मत और फैसले लेने की ताकत देता है। अगर मंगल मजबूत हो, तो इंसान जीवन में आगे बढ़ता है और मुश्किलों से डटकर लड़ता है।

कमजोर मंगल के नुकसान

कुंडली में मंगल कमजोर होने पर व्यक्ति का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना, झगड़ों में फंसना और गलत फैसले लेना आम हो जाता है। ऐसे लोगों को नौकरी और कारोबार में बार-बार रुकावटों का सामना करना पड़ता है। धन टिकता नहीं और मेहनत के बावजूद सफलता हाथ नहीं लगती। कई बार आत्मविश्वास इतना गिर जाता है कि इंसान खुद पर ही शक करने लगता है।

सेहत और स्वभाव पर असर

कमजोर मंगल का असर सिर्फ करियर और पैसों पर ही नहीं, बल्कि सेहत पर भी पड़ता है। ऐसे लोगों को ब्लड प्रेशर, खून से जुड़ी दिक्कतें और गुस्से की वजह से तनाव रहता है। मन अशांत रहता है और किसी काम में मन नहीं लगता। घर-परिवार में भी बात-बात पर तकरार बढ़ जाती है।

मंगल को मजबूत करने के देसी उपाय

मंगल को मजबूत करने के लिए हनुमान जी की पूजा सबसे असरदार मानी जाती है। हर मंगलवार हनुमान चालीसा का पाठ करें और बजरंगबली को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं, जिसे चोला चढ़ाना कहा जाता है। मंगलवार का व्रत रखने से भी मंगल की स्थिति सुधरती है। लाल रंग का दान करना और जरूरतमंदों की मदद करना भी लाभ देता है।

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मंत्र और रत्न का महत्व

मंगल ग्रह को बल देने के लिए “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” मंत्र का रोज जप करें। अगर संभव हो तो किसी जानकार ज्योतिषी की सलाह से मूंगा रत्न धारण करें। बिना सलाह के रत्न पहनने से बचें। साथ ही, नियमित व्यायाम करें और आलस्य छोड़ें, क्योंकि कर्म और अनुशासन से भी मंगल मजबूत होता है।

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