जिस गैस से गुब्बारे उड़ते हैं, वही Helium आज पूरी दुनिया के लिए बेहद जरूरी बन चुकी है। यह रंगहीन और गंधहीन गैस है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी ताकत है—कूलिंग यानी ठंडा रखने की क्षमता। देसी भाषा में कहें तो “छोटी सी गैस, लेकिन बड़ा काम”।
क्यों आया Helium का संकट?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर Iran से जुड़े विवाद के कारण सप्लाई चेन पर असर पड़ा है। दुनिया का करीब 30% Helium सप्लाई करने वाला Qatar भी इस संकट से प्रभावित हुआ है। साथ ही Strait of Hormuz में फंसे कंटेनर ने स्थिति और बिगाड़ दी।
टेक्नोलॉजी और AI पर क्या असर पड़ेगा?
Helium का सबसे बड़ा इस्तेमाल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में होता है। कंप्यूटर चिप्स और AI सिस्टम बनाने में इसे कूलिंग के लिए यूज किया जाता है। अगर इसकी कमी बढ़ी, तो स्मार्टफोन, लैपटॉप और AI टूल्स की प्रोडक्शन पर सीधा असर पड़ेगा। मतलब “मोबाइल महंगे और कम मिल सकते हैं”।
मेडिकल और स्पेस सेक्टर भी होंगे प्रभावित
अस्पतालों में MRI मशीन को ठंडा रखने के लिए Helium जरूरी है। इसके बिना मशीन काम ही नहीं करेगी। वहीं स्पेस इंडस्ट्री में रॉकेट लॉन्च के दौरान फ्यूल टैंक साफ करने के लिए इसका इस्तेमाल होता है। यानी “धरती से लेकर अंतरिक्ष तक Helium का जलवा है”।
मार्केट और आम लोगों पर असर
अगर Helium की कमी जारी रही, तो इलेक्ट्रॉनिक्स और कार इंडस्ट्री में प्रोडक्शन घट सकता है। इससे कीमतें बढ़ेंगी और नए प्रोडक्ट्स लॉन्च में देरी हो सकती है। देसी अंदाज में समझें—“सप्लाई कम, तो दाम ज्यादा”।



